CISF जवान बनकर ठगी का नया जाल: “ट्रांसफर के कारण सामान बेच रहा हूं” कहकर लोगों को बना रहे निशाना

देश में साइबर अपराध तेजी से नए-नए रूप ले रहा है। अब ठग सरकारी सुरक्षा बलों जैसे CISF (सेंट्रल इंडस्ट्रियल सिक्योरिटी फोर्स) के जवानों की पहचान का दुरुपयोग कर लोगों को ठग रहे हैं। ये ठग खुद को CISF, आर्मी या BSF का जवान बताकर भरोसे का माहौल बनाते हैं और फिर ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स जैसे OLX, Facebook Marketplace और WhatsApp पर फर्जी विज्ञापन डालकर ठगी को अंजाम देते हैं।

ठगों की आम कहानी होती है—“मेरा ट्रांसफर हो गया है, इसलिए घर का सामान सस्ते में बेचना है।” लोग सुरक्षा बलों पर भरोसा कर लेते हैं और यही उनका नुकसान करा देता है।
2018 से शुरू हुई यह ठगी अब सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर तेजी से फैल चुकी है।

DFRAC (डिजिटल फॉरेंसिक्स रिसर्च एंड एनालिसिस सेंटर) की 2021 की एक रिपोर्ट के अनुसार, इस तरह की ठगी तीन महीने से अधिक समय तक चलती रही और सैकड़ों लोगों को इसका शिकार बनाया गया। CISF ने खुद अपने आधिकारिक X (ट्विटर) अकाउंट पर लोगों को सतर्क रहने की चेतावनी दी थी—“OLX पर CISF के नाम से चल रहे फर्जी विज्ञापनों से सावधान रहें।”

ठगी का तरीका:

ठग OLX, Facebook Marketplace या Quikr पर आकर्षक विज्ञापन डालते हैं—जैसे “CISF जवान का ट्रांसफर, सोफा सेट ₹10,000, फ्रिज ₹8,000, AC ₹12,000 – सब कुछ सिर्फ 4 महीने पुराना।”

संपर्क करने पर फर्जी CISF ID कार्ड, आधार कार्ड या यूनिफॉर्म वाली फोटो भेजते हैं।

कभी-कभी आर्मी या BSF का नाम लेकर विश्वास जीतने की कोशिश करते हैं।

कहते हैं—“ट्रांसफर के कारण सामान जल्दी बेचना है, एयरपोर्ट से सीधी डिलीवरी होगी।”

PhonePe या Google Pay से एडवांस पेमेंट मंगाते हैं।

भुगतान के बाद सामान कभी नहीं भेजा जाता, और पीड़ित का पैसा सीधा ठगों के खाते में चला जाता है।

साइबर विशेषज्ञों की सलाह:

किसी भी व्यक्ति की सरकारी पहचान या यूनिफॉर्म वाली फोटो देखकर तुरंत भरोसा न करें।

ऑनलाइन खरीदारी से पहले वीडियो कॉल पर सामान की पुष्टि करें।

डिलीवरी से पहले पेमेंट करने से बचें।

अगर ठगी का शिकार हों तो तुरंत साइबर क्राइम पोर्टल (www.cybercrime.gov.in
) या स्थानीय थाने में शिकायत दर्ज कराएं।

सावधानी ही सुरक्षा है—क्योंकि अब ठग वर्दी के नाम पर भी लोगों की मेहनत की कमाई हड़पने लगे हैं।

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