नई दिल्ली: सार्वजनिक परिवहन के लिए केंद्र सरकार ला सकती है वार्षिक FASTag पास, निजी बस ऑपरेटरों को मिलेगी रियायती भूमि सुविधा
नई दिल्ली। केंद्र सरकार सार्वजनिक परिवहन को और सुविधाजनक बनाने के लिए एक बड़ा कदम उठाने जा रही है। केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय राज्य परिवहन निगम की बसों और निजी व्यावसायिक वाहनों के लिए भी वार्षिक FASTag पास लागू करने पर विचार कर रहा है। इसका उद्देश्य बस ऑपरेटरों और परिवहन क्षेत्र से जुड़े लाखों लोगों को लाभ पहुंचाना है।
मंत्रालय ने यह भी संकेत दिया है कि राष्ट्रीय राजमार्गों के किनारे सुविधाएं विकसित करने के लिए निजी बस संचालकों के समूहों को रियायती दर पर भूमि उपलब्ध कराई जाएगी।
देश में 92% बसें निजी क्षेत्र की
बस एंड कार ऑपरेटर्स कन्फेडरेशन ऑफ इंडिया के अनुसार, देश में लगभग 20 लाख बसें चलती हैं, जिनमें से 92 प्रतिशत निजी क्षेत्र की हैं। प्रतिदिन 40 करोड़ यात्री बसों से सफर करते हैं, जिनमें से 32 करोड़ निजी बसों का उपयोग करते हैं। इसके बावजूद, निजी बस संचालकों को बुनियादी सुविधाओं की कमी का सामना करना पड़ता है।
निजी और राज्य परिवहन के लिए वार्षिक FASTag पास
निजी बस और कैब ऑपरेटरों की मांग पर केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने आश्वासन दिया है कि जिस तरह निजी कार चालकों के लिए 3,000 रुपये का वार्षिक FASTag पास उपलब्ध है, उसी तरह का प्रावधान राज्य परिवहन निगम और निजी बस/कैब संचालकों के लिए भी किया जाएगा। इस संबंध में मंत्रालय अध्ययन कर रहा है कि इसे किस प्रकार लागू किया जाए ताकि परिवहन सेवाओं को सीधा लाभ मिल सके।
गति सीमा पर भी होगी एकरूपता
गडकरी ने यह भी कहा कि व्यावसायिक और निजी वाहनों के लिए अलग-अलग गति सीमा तय करने की व्यवस्था व्यावहारिक नहीं है। राज्यों के साथ हो रही बैठकों में इस विषय पर चर्चा की जा रही है और प्रयास है कि गति सीमा को लेकर पूरे देश में एक समान नियम लागू हो।
रियायती भूमि पर इन्फ्रास्ट्रक्चर
केंद्रीय मंत्री ने निजी बस संचालकों को सुझाव दिया कि यदि वे एफपीओ (Farmer Producer Organization) की तरह समूह बनाकर आवेदन करें, तो उन्हें राष्ट्रीय राजमार्गों के किनारे रियायती दर पर भूमि उपलब्ध कराई जाएगी, जहां बसों के लिए यात्री सुविधाएं विकसित की जा सकेंगी। मंत्रालय इस संबंध में नीति बनाने पर विचार कर रहा है।
