नेवादा : वेपिंग से किशोरी को हुआ ‘पॉपकॉर्न लंग्स’, जानें इसके लक्षण और कारण

वर्षों तक वेपिंग करने के बाद सामने आया गंभीर और दुर्लभ फेफड़ों का रोग

नेवादा:  17 वर्षीय हाई स्कूल चीयरलीडर ब्रियाना मार्टिन ने एक दिन अभ्यास सत्र के दौरान अपनी मां को फोन कर बताया कि वह सांस नहीं ले पा रही हैं। शुरुआत में इसे घबराहट या पैनिक अटैक समझा गया, लेकिन जांच में पता चला कि ब्रियाना को ‘पॉपकॉर्न लंग्स’ नामक एक दुर्लभ और गंभीर फेफड़ों की बीमारी हो गई है, जिसका मुख्य कारण वर्षों तक लगातार वेपिंग करना रहा।

क्या है पॉपकॉर्न लंग्स?
‘पॉपकॉर्न लंग्स’ को चिकित्सकीय भाषा में ब्रोंकियोलाइटिस ऑब्लिटरेन्स कहा जाता है। यह एक ऐसी स्थिति है जिसमें फेफड़ों की सबसे छोटी वायु नलिकाएं क्षतिग्रस्त हो जाती हैं, जिससे व्यक्ति को खांसी और सांस लेने में परेशानी होती है। इसका संबंध सबसे पहले माइक्रोवेव पॉपकॉर्न की खुशबू के लिए इस्तेमाल होने वाले रसायन डायसिटील से पाया गया था।

हालांकि, अब यह बीमारी ई-सिगरेट और वेपिंग फ्लेवर में प्रयुक्त रसायनों जैसे डायसिटील और एसीटाल्डिहाइड के कारण भी हो रही है।

ब्रियाना का तीन साल का वेपिंग इतिहास
ब्रियाना ने लगभग तीन वर्षों तक हर दिन डिस्पोजेबल वेप का इस्तेमाल किया। हालांकि अब उन्होंने वेपिंग छोड़ दी है और इन्हेलर का सहारा ले रही हैं। ब्रियाना की मां क्रिस्टी ने बताया, “वह अचानक फोन कर कहने लगी कि उसे सांस नहीं आ रही। यह मेरे लिए सबसे डरावना पल था। डॉक्टरों ने बताया कि यह ‘पॉपकॉर्न लंग्स’ है और यह स्थायी रूप से फेफड़ों को नुकसान पहुंचा सकता है। हालांकि इसे शुरुआती अवस्था में पकड़ लिया गया है, इसलिए पूरी तरह ठीक होने की उम्मीद है। लेकिन यह भविष्य में कैंसर जैसी गंभीर समस्याएं भी पैदा कर सकता है।”

पॉपकॉर्न लंग्स के लक्षण

  • सूखी खांसी
  • सांस लेने में कठिनाई
  • शारीरिक मेहनत या व्यायाम करते समय लक्षण और बढ़ जाना
    ये लक्षण किसी विषैली गैस के संपर्क में आने या किसी गंभीर फेफड़ों की बीमारी के 2 हफ्ते से 2 महीने के भीतर दिख सकते हैं।

पॉपकॉर्न लंग्स के कारण
इस रोग का मुख्य कारण डायसिटील नामक रसायन है, जो पहले पॉपकॉर्न फ्लेवरिंग में इस्तेमाल होता था, लेकिन अब कुछ ई-सिगरेट फ्लेवर में पाया जाता है।
अन्य कारणों में शामिल हैं:

  • एसीटाल्डिहाइड – मारिजुआना और कुछ ई-सिगरेट के धुएं में पाया जाने वाला रसायन
  • मेटल ऑक्साइड धुएं – वेल्डिंग से उत्पन्न
  • फॉर्मल्डिहाइड – कैंसर पैदा करने वाला रसायन

सल्फर डाइऑक्साइड, अमोनिया, क्लोरीन, नाइट्रोजन ऑक्साइड्स, हाइड्रोक्लोरिक एसिड, और सल्फर मस्टर्ड (मस्टर्ड गैस) जैसे रसायन

कभी-कभी यह स्थिति गंभीर फेफड़ों की बीमारी (जैसे निमोनिया या ब्रोंकाइटिस) या रुमेटाइड आर्थराइटिस जैसी बीमारियों के बाद भी विकसित हो सकती है।

पॉपकॉर्न लंग्स एक गंभीर और स्थायी फेफड़ों की बीमारी है, जो वेपिंग जैसी आदतों से भी हो सकती है। यह रोग धीमे-धीमे फेफड़ों को इतना नुकसान पहुंचा सकता है कि सामान्य जीवन भी कठिन हो जाए। युवाओं को इस बारे में जागरूक करने की आवश्यकता है ताकि वे इस खतरनाक लत से दूर रह सकें।

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