नरेंद्र मोदी आज ‘सेवा तीर्थ’ में करेंगे प्रवेश, 95 साल पुराने नॉर्थ-साउथ ब्लॉक से समाप्त होगा सरकारी कामकाज

नई दिल्ली। भारतीय प्रशासनिक इतिहास में 13 फरवरी 2026 एक ऐतिहासिक दिन के रूप में दर्ज हो गया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज रायसीना हिल्स स्थित नॉर्थ और साउथ ब्लॉक को छोड़कर अपने नए अत्याधुनिक कार्यालय ‘सेवा तीर्थ’ में प्रवेश करेंगे। इसके साथ ही करीब 95 वर्षों से देश की सत्ता और प्रशासन का केंद्र रहे इन ऐतिहासिक भवनों से सरकारी कामकाज का दौर समाप्त हो जाएगा।

प्रधानमंत्री मोदी ने दोपहर करीब 1:30 बजे ‘सेवा तीर्थ’ भवन परिसर के नाम का अनावरण किया। इसके बाद वे रायसीना हिल्स स्थित पुराने सचिवालय में केंद्रीय मंत्रिमंडल की अंतिम बैठक करेंगे और फिर ‘सेवा तीर्थ’ तथा मंत्रालयों के लिए बनाए गए ‘कर्तव्य भवन-1 और 2’ का औपचारिक उद्घाटन करेंगे।

क्या है ‘सेवा तीर्थ’

‘सेवा तीर्थ’ का अर्थ है ‘सेवा का स्थान’। पहले इसे एग्जीक्यूटिव एन्क्लेव के नाम से जाना जाता था। यह परिसर नई दिल्ली के दारा शिकोह रोड पर लगभग 5 एकड़ क्षेत्र में फैला हुआ है और इसका निर्माण एल एंड टी कंपनी ने करीब 1189 करोड़ रुपये की लागत से किया है।

इस आधुनिक परिसर में तीन प्रमुख हिस्से बनाए गए हैं—पहले हिस्से में प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO), दूसरे में कैबिनेट सचिवालय और तीसरे में राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद तथा राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार का कार्यालय स्थित होगा। यह भवन स्मार्ट एक्सेस कंट्रोल, एडवांस सर्विलांस सिस्टम और आधुनिक आपातकालीन सुविधाओं से लैस है।

नाम के पीछे ‘जन-सेवा’ की सोच

प्रधानमंत्री मोदी ने 2014 में कार्यभार संभालते समय खुद को ‘प्रधान सेवक’ बताया था। ‘सेवा तीर्थ’ नाम उसी विचारधारा का विस्तार माना जा रहा है। इसका उद्देश्य यह संदेश देना है कि देश के 145 करोड़ नागरिकों की सेवा के लिए यह परिसर 24 घंटे कार्य करेगा और प्रशासन को अधिक पारदर्शी, आधुनिक और कुशल बनाया जाएगा।

मंत्रालयों को मिलेगा नया एकीकृत परिसर

अब तक केंद्र सरकार के मंत्रालय अलग-अलग स्थानों पर स्थित थे, जिससे फाइलों के आदान-प्रदान और समन्वय में समय लगता था। ‘कर्तव्य भवन-1 और 2’ में वित्त, रक्षा, स्वास्थ्य, शिक्षा और कृषि सहित कई प्रमुख मंत्रालयों को एक ही परिसर में स्थानांतरित किया गया है। इससे मंत्रालयों के बीच बेहतर तालमेल और कामकाज की गति में तेजी आने की उम्मीद है। इन इमारतों का निर्माण पर्यावरण-अनुकूल मानकों के अनुरूप किया गया है और इनमें सोलर एनर्जी तथा आधुनिक वेस्ट मैनेजमेंट प्रणाली की व्यवस्था है।

नॉर्थ और साउथ ब्लॉक बनेंगे राष्ट्रीय संग्रहालय

ब्रिटिश आर्किटेक्ट हर्बर्ट बेकर द्वारा डिजाइन किए गए ऐतिहासिक नॉर्थ और साउथ ब्लॉक को अब ‘युगे-युगेन भारत नेशनल म्यूजियम’ में परिवर्तित किया जाएगा। यह संग्रहालय भारत की हजारों वर्षों पुरानी सभ्यता, संस्कृति और विरासत को प्रदर्शित करेगा और दुनिया के सबसे बड़े संग्रहालयों में शामिल होगा।

सेंट्रल विस्टा परियोजना का हिस्सा

‘सेवा तीर्थ’ सेंट्रल विस्टा पुनर्विकास परियोजना का महत्वपूर्ण हिस्सा है, जिसकी घोषणा वर्ष 2019 में की गई थी। इस परियोजना के तहत नया संसद भवन, कर्तव्य पथ, साझा केंद्रीय सचिवालय और प्रधानमंत्री का नया आवास बनाया गया है। सरकार का मानना है कि नया परिसर आधुनिक प्रशासनिक जरूरतों को पूरा करने के साथ-साथ विकसित भारत की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित होगा।

 

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