नई दिल्ली, 30 जून: मुकेश अंबानी एक ऐसी अंतरराष्ट्रीय डील की तैयारी में हैं, जो न सिर्फ भारत बल्कि अमेरिका और चीन जैसे वैश्विक ताकतवर देशों को भी चौंका सकती है। इकोनॉमिक टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, रिलायंस इंडस्ट्रीज रूसी तेल दिग्गज PJSC Rosneft Oil Company से भारत की प्रमुख तेल रिफाइनिंग कंपनी नायरा एनर्जी में 49.13% हिस्सेदारी खरीदने की शुरुआती बातचीत कर रही है।
रूसी कंपनी क्यों बेचना चाहती है हिस्सा?
पश्चिमी देशों द्वारा लगाए गए प्रतिबंधों के चलते रोसनेफ्ट को भारत से अपने लाभ को निकालने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। यही वजह है कि वह नायरा एनर्जी से बाहर निकलने के विकल्प तलाश रही है।
अंबानी की रणनीति क्या है?
अंबानी इस मौके को भुनाकर न केवल भारत के तेल क्षेत्र में अपनी पकड़ मजबूत करना चाहते हैं, बल्कि इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन (IOC) को पछाड़कर देश के नंबर-1 रिफाइनर भी बन सकते हैं। इस डील से फ्यूल मार्केटिंग क्षेत्र में रिलायंस की पैठ और भी मजबूत होगी। यही कारण है कि अमेरिका और चीन इस संभावित डील पर करीबी नजर बनाए हुए हैं।
गौतम अडाणी ने क्यों ठुकराया प्रस्ताव?
हालांकि यह प्रस्ताव अडाणी ग्रुप, सऊदी अरामको और ONGC-IOC समूह को भी दिया गया था, लेकिन अडाणी ग्रुप ने इसे विनम्रता से ठुकरा दिया। सूत्रों के मुताबिक, नायरा की 20 अरब डॉलर की कीमत को निवेशक बहुत अधिक मान रहे हैं।
इसके साथ ही, अडाणी ग्रुप की फ्रांसीसी ऊर्जा कंपनी TotalEnergies के साथ गैस और रिन्यूएबल एनर्जी को लेकर बहु-अरब डॉलर की साझेदारी भी इस निवेश के रास्ते में बाधा बनी। अडाणी ने इस समझौते के तहत जीवाश्म ईंधन (फॉसिल फ्यूल) में भविष्य के निवेश को केवल प्राकृतिक गैस तक सीमित करने की बात मानी है।
डील को लेकर बातचीत अभी प्रारंभिक चरण में है, और इसकी सफलता या असफलता का निर्णय मूल्यांकन और रणनीतिक सहमति पर निर्भर करेगा।
