मराठी भाषा का ‘अपमान’ किया जा रहा है: त्रिभाषा नीति पर सरकारी बैठकों पर संजय राउत का आरोप

मुंबई, 23 जून — शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) के राज्यसभा सांसद संजय राउत ने महाराष्ट्र सरकार द्वारा तीन-भाषा नीति को लेकर की जा रही बैठकों को मराठी भाषा का “अपमान” करार दिया है। उन्होंने कहा कि हिंदी को जबरन लागू करने की कोशिशों के पीछे कोई और मंशा छिपी है।

पत्रकारों से बात करते हुए राउत ने पूछा कि जब मराठी को बढ़ावा देने की बात आती है, तब मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे चुप क्यों रहते हैं। उन्होंने सवाल किया, “क्या सीएम और डिप्टी सीएम ने कभी मराठी भाषा को बढ़ावा देने के लिए कोई बैठक बुलाई?”

राउत ने कहा कि सरकार ने जो नया आदेश जारी किया है, उसके मुताबिक कक्षा 1 से 5 तक मराठी और इंग्लिश माध्यम स्कूलों में तीसरी भाषा के रूप में आमतौर पर हिंदी पढ़ाई जाएगी। भले ही यह अनिवार्य नहीं है, लेकिन अन्य भारतीय भाषाएं पढ़ने के लिए हर कक्षा में कम से कम 20 छात्रों की सहमति जरूरी है। इससे विवाद खड़ा हो गया है।

उन्होंने मराठी साहित्यकारों और कलाकारों की चुप्पी पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि सरकार से जुड़े होने के कारण वे खुलकर विरोध नहीं कर रहे हैं। “क्या देवेंद्र फडणवीस को महाराष्ट्र के 10 प्रमुख साहित्यकारों के नाम मालूम हैं? क्या शिंदे पांच नाम बता सकते हैं?” राउत ने तंज कसा।

उन्होंने यह भी कहा कि जिन लोगों के बच्चे अंग्रेज़ी माध्यम स्कूलों में पढ़ते हैं, उन्हें मराठी की रक्षा पर नैतिकता का उपदेश देने का कोई हक नहीं है। “मेरे बच्चे मराठी माध्यम में पढ़े हैं। लेकिन ज़्यादातर मंत्री और लेखक अपने बच्चों को अंग्रेज़ी माध्यम में भेजते हैं।”

राउत ने दक्षिण भारतीय अभिनेता प्रकाश राज की प्रशंसा करते हुए पूछा, “जब एक दक्षिण भारतीय कलाकार हिंदी थोपने का विरोध कर सकता है, तो हमारे मराठी कलाकार कहां हैं? नाना पाटेकर, प्रशांत दामले, माधुरी दीक्षित और मराठी क्रिकेटर क्यों चुप हैं?”

तीन-भाषा नीति पर सरकार की हालिया बैठकों को उन्होंने “अवसरवाद और दिखावा” बताया और कहा कि केवल आदेश वापस लेकर मराठी भाषा के पक्ष में एक ठोस कदम उठाया जा सकता है। “बैठकें कर-कर के केवल मराठी भाषा का अपमान किया जा रहा है,” उन्होंने कहा।

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