अमृतसर में आज़ाद टैक्सी यूनियन का बड़ा प्रदर्शन, हिमाचल सरकार के खिलाफ नारेबाजी

“गुंडा टैक्स से टैक्सी चालक परेशान”—बढ़े टैक्सों के खिलाफ तीखा विरोधकोरोना से लेकर मौजूदा महंगाई तक—टैक्सी कारोबार पर लगातार मारलोन की किस्तें और घर का खर्च चलाना मुश्किल, ड्राइवरों ने बयां किया दर्द10 तारीख तक मांगें न मानी गईं तो बॉर्डर पर बड़ा एक्शन करने की चेतावनी

आज पंजाब भर से आज़ाद टैक्सी यूनियन के सदस्य अमृतसर में इकट्ठा हुए और हिमाचल सरकार के खिलाफ जोरदार रोष प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि हिमाचल सरकार द्वारा टैक्सी चालकों पर लगातार “गुंडा टैक्स” लगाया जा रहा है, जो पूरी तरह गलत और अन्यायपूर्ण है। इस दौरान ड्राइवरों ने नारेबाजी करते हुए सरकार के फैसलों पर गंभीर सवाल उठाए।

मीडिया से बातचीत करते हुए आज़ाद टैक्सी यूनियन के प्रधान जसबीर सिंह बोपाराय और उनके साथियों ने बताया कि टैक्सी चालक पहले ही कई संकटों से जूझ रहे हैं। कोरोना महामारी के दौरान टूरिज्म सेक्टर पूरी तरह ठप हो गया था, जिससे उनकी आय खत्म हो गई। इसके बाद पहलगाम में हुए आतंकी हमले और दो देशों के बीच बने तनाव के कारण भी पर्यटन पर बुरा असर पड़ा।

उन्होंने कहा कि बाढ़ के कारण भी कई वाहनों को नुकसान हुआ और अब ईरान-इजरायल युद्ध के चलते तेल की कीमतें बढ़ने से महंगाई और बढ़ गई है। इसके साथ ही हिमाचल सरकार द्वारा टैक्सों में की गई भारी बढ़ोतरी टैक्सी चालकों के लिए नई मुश्किलें खड़ी कर रही है।

टैक्सी चालकों का आरोप है कि पहले छोटी गाड़ियों पर 30 रुपये टैक्स था, जिसे पहले 70 रुपये किया गया और अब सीधे 170 रुपये कर दिया गया है। इसके अलावा तीन महीने का टैक्स भी काफी बढ़ा दिया गया है। उनका कहना है कि वे पहले ही पंजाब सरकार और केंद्र सरकार को टैक्स दे रहे हैं, ऐसे में हिमाचल में अलग से टैक्स लगाना किस नियम के तहत है।

चालकों ने यह भी बताया कि हिमाचल में कई जगहों पर आरटीओ अधिकारियों द्वारा कथित तौर पर अवैध वसूली की जाती है और कई बार टैक्सी चालकों के साथ मारपीट भी होती है। उन्होंने डलहौजी, धर्मशाला और अन्य इलाकों में आने वाली समस्याओं का भी जिक्र किया, जहां टैक्सी चालकों को सवारियां उठाने से रोका जाता है।

इसके साथ ही टैक्सी मालिकों ने अपनी आर्थिक स्थिति पर भी गंभीर चिंता जताई। ज्यादातर गाड़ियां लोन पर हैं और किस्तें भरना मुश्किल हो गया है। घर का खर्च चलाना कठिन हो रहा है और बच्चों की फीस तक भरने में दिक्कत आ रही है। ड्राइवरों का कहना है कि इतना खर्च करने के बावजूद उनके पास कुछ भी नहीं बचता।
प्रदर्शनकारियों ने पंजाब सरकार से अपील की कि वह हिमाचल सरकार के साथ बातचीत कर इस समस्या का समाधान करवाए। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर 10 तारीख तक उनकी मांगें पूरी नहीं की गईं तो वे बॉर्डर पर बड़ा प्रदर्शन करेंगे।

मौजूदा हालात को देखते हुए साफ है कि टैक्सी चालकों का गुस्सा लगातार बढ़ रहा है और अगर जल्द समाधान नहीं निकला तो यह आंदोलन और बड़ा रूप ले सकता है।

 

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