जापान में मुसलमानों के दफन संस्कार को लेकर बड़ा विवाद — सरकार ने कब्रिस्तान के लिए जमीन देने से इनकार किया
जापान, दिसंबर 2025 — जापान सरकार ने देश में मुस्लिम समुदाय के लिए नई कब्रिस्तान जमीन देने से साफ इनकार कर दिया है। इस फैसले से वहां रह रहे प्रवासी और स्थानीय मुस्लिमों के सामने धार्मिक संस्कार से जुड़ी बड़ी समस्या खड़ी हो गई है।
क्यों उठी यह बहस
जापान में पारंपरिक रूप से शवों का दाह-संस्कार (cremation) किया जाता है, और 99.9% से भी अधिक मामले इसी पद्धति के होते हैं।
वहीं, इस्लामी धर्मानुसार शव का दफनाना अनिवार्य है। इसलिए मुस्लिम समुदाय ने कब्रिस्तान की मांग की थी।
लेकिन सरकार ने कहा है कि देश में भूमि की भारी कमी है और जमीन उपलब्ध नहीं है। इसलिए नया कब्रिस्तान नहीं बनाया जाएगा।
सरकार क्या कह रही है
सरकार का कहना है कि जापान में दाह-संस्कार की परंपरा रही है, और Cremation (शवदाह) उनका संस्कार है। मुस्लिम समुदाय को दफनाने की जगह नहीं दी जाएगी — अगर वे दफनाना चाहते हैं, तो शव को उनके मूल देश भेजने की सलाह दी जाती है।
Muslim समुदाय की मुश्किलें
जापान में मुस्लिम आबादी बढ़ रही है (लगभग 2 लाख से लेकर 3.5 लाख तक)
सातत्यपूर्वक बढ़ती आबादी की वजह से existing कब्रिस्तानों में जगह सीमित हो चुकी है; नए कब्रिस्तान बनाने की मांग पर स्थानीय विरोध और आर्थिक — भू-संसाधन की समस्याएँ सामने आती हैं।
मुस्लिम समुदाय अब यह चिंता कर रहा है कि उनके धार्मिक अधिकारों — अंतिम संस्कार के तरीके — को नजरअंदाज किया जा रहा है।
अब मुस्लिम समुदाय क्या कर रहा है
कुछ मुस्लिम संगठनों का कहना है कि वे इस फैसले का विरोध करेंगे और न्यायालय का दरवाज़ा खटखटाएंगे, अपना धार्मिक अधिकार माँगेंगे। वहीं अन्य लोग यह देख रहे हैं कि क्या जापानी समाज अपने परंपरागत दाह-संस्कार संस्कृति से समझौता कर सकेगा।
समस्या क्यों बन रही है?
जापान उच्च जनसंख्या घनत्व और सीमित भूमि वाले द्वीपीय देश है।
उनकी धार्मिक और सांस्कृतिक व्यवस्था का हिस्सा है।
कब्रिस्तान बनाने की मांग को स्थानीय निवासी और प्राधिकरण पर्यावरण, भूमि उपयोग व सामाजिक मान्यताओं को लेकर अस्वीकार करते रहे हैं।
