महाशिवरात्रि 2026: समुद्र की लहरों से होता है जलाभिषेक, दिन में दो बार ‘गायब’ हो जाता है स्तंभेश्वर महादेव मंदिर
महाशिवरात्रि के पावन अवसर पर देशभर के शिव मंदिरों में श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ती है। भारत में भगवान शिव के कई प्राचीन और रहस्यमयी मंदिर स्थित हैं, लेकिन गुजरात का एक मंदिर अपनी अनोखी विशेषता के कारण अलग पहचान रखता है। यह मंदिर दिन में दो बार समुद्र की लहरों में समा जाता है और फिर कुछ समय बाद दोबारा प्रकट हो जाता है।
समुद्र करता है शिवलिंग का जलाभिषेक
गुजरात के वडोदरा जिले के पास कावी-कंबोई क्षेत्र में अरब सागर के किनारे स्थित स्तंभेश्वर महादेव मंदिर को ‘गायब होने वाला शिव मंदिर’ भी कहा जाता है। यहां शिवलिंग का जलाभिषेक स्वयं समुद्र की लहरें करती हैं, वह भी दिन में दो बार। इस अद्भुत दृश्य को देखने के लिए दूर-दूर से श्रद्धालु यहां पहुंचते हैं।
क्यों गायब हो जाता है मंदिर?
हालांकि कई लोग इसे चमत्कार मानते हैं, लेकिन इसके पीछे प्राकृतिक कारण है। यह मंदिर समुद्र तट से कुछ दूरी पर स्थित है और यहां ज्वार-भाटा का सीधा प्रभाव पड़ता है। जब ज्वार आता है तो समुद्र का जलस्तर बढ़ जाता है और पूरा मंदिर पानी में डूब जाता है। भाटा के समय पानी का स्तर घटने पर मंदिर फिर से दिखाई देने लगता है।
प्राकृतिक रुद्राभिषेक का अनोखा नजारा
समुद्र का पानी रोजाना दो बार शिवलिंग का प्राकृतिक रुद्राभिषेक करता है। यह दृश्य श्रद्धालुओं के लिए आस्था और प्रकृति का अद्भुत संगम प्रस्तुत करता है। महाशिवरात्रि के अवसर पर यहां विशेष पूजा-अर्चना की जाती है और बड़ी संख्या में भक्त दर्शन के लिए पहुंचते हैं।
स्थानीय पुजारी श्रद्धालुओं को ज्वार-भाटा का समय देखकर ही दर्शन के लिए आने की सलाह देते हैं। मंदिर के दर्शन का समय प्रतिदिन ज्वार-भाटा के अनुसार तय किया जाता है, ताकि श्रद्धालु सुरक्षित रूप से पूजा-अर्चना कर सकें।
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