Mahashivratri 2026: महाशिवरात्रि पर शिवलिंग पर भूलकर भी न चढ़ाएं ये चीजें, वरना पूजा का फल हो सकता है निष्फल
हिंदू धर्म में महाशिवरात्रि का पर्व अत्यंत श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाया जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन भगवान शिव का विधि-विधान से पूजन करने से जीवन की सभी बाधाएं दूर होती हैं। वर्ष 2026 में महाशिवरात्रि का व्रत 17 फरवरी को रखा जाएगा। इस दिन शिवलिंग पर जलाभिषेक और रुद्राभिषेक का विशेष महत्व है, लेकिन शास्त्रों में कुछ ऐसी चीजों का भी उल्लेख है, जिन्हें शिवलिंग पर अर्पित करना अशुभ माना गया है।
महाशिवरात्रि की पूजा में रखें विशेष सावधानी
महाशिवरात्रि के दिन पूजा करते समय यदि नियमों का पालन न किया जाए, तो पूजा का पूरा फल नहीं मिलता। इसलिए शिवलिंग पर कुछ वस्तुएं चढ़ाने से बचना चाहिए।
शिवलिंग पर न चढ़ाएं तुलसी
भगवान विष्णु को तुलसी अत्यंत प्रिय है, लेकिन भगवान शिव को तुलसी अर्पित करना निषेध माना गया है। मान्यता है कि शिवलिंग पर तुलसी चढ़ाने से पूजा निष्फल हो जाती है। इसकी बजाय बेलपत्र, धतूरा और आक के फूल अर्पित करने से भोलेनाथ प्रसन्न होते हैं।
न करें हल्दी और सिंदूर का तिलक
शिवलिंग पर हल्दी और सिंदूर लगाना भी वर्जित माना गया है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार भगवान शिव वैराग्य के प्रतीक हैं और उन्हें चंदन या भस्म अर्पित करना शुभ माना जाता है, न कि हल्दी-सिंदूर।
शिवलिंग की पूरी परिक्रमा न करें
अक्सर भक्त पूजा के बाद शिवलिंग की पूरी परिक्रमा कर लेते हैं, लेकिन शास्त्रों के अनुसार यह सही नहीं है। शिवलिंग से जल और दूध बहता है, जिसे लांघना अशुभ माना जाता है। इसलिए भगवान शिव की आधी परिक्रमा ही करनी चाहिए।
तांबे के बर्तन से न चढ़ाएं दूध
महाशिवरात्रि पर शिवलिंग पर दूध चढ़ाया जाता है, लेकिन तांबे के बर्तन से दूध अर्पित करना वर्जित माना गया है। मान्यता है कि तांबे के संपर्क में आने से दूध विष के समान हो जाता है। साथ ही पूजा के समय जलधारी के सामने बैठकर पूजा भी नहीं करनी चाहिए।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार यदि महाशिवरात्रि के दिन इन नियमों का ध्यान रखा जाए और श्रद्धा के साथ भोलेनाथ की पूजा की जाए, तो भगवान शिव शीघ्र प्रसन्न होकर भक्तों की मनोकामनाएं पूर्ण करते हैं।
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