Lolark Chhath: आज है लोलार्क छठ, संतान प्राप्ति के लिए काशी के लोलार्क कुंड में उमड़ा श्रद्धालुओं का सैलाब
सूर्यदेव और लोलार्केश्वर महादेव की पूजा-अर्चना से पूरी होती है मनोकामना
वाराणसी। भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि को मनाया जाने वाला लोलार्क छठ महापर्व आज पूरे श्रद्धा और आस्था के साथ काशी में आयोजित हो रहा है। संतान प्राप्ति की कामना से हजारों-लाखों श्रद्धालु लोलार्क कुंड में स्नान कर सूर्यदेव और लोलार्केश्वर महादेव की पूजा-अर्चना कर रहे हैं।
लोलार्क छठ की विशेष मान्यता है कि इस दिन कुंड में स्नान और भगवान सूर्य की उपासना करने से दंपतियों को संतान सुख की प्राप्ति होती है। साथ ही सभी शारीरिक कष्टों से मुक्ति मिलती है। श्रद्धालु भोर से ही लोलार्क कुंड पहुंचकर तीन बार डुबकी लगाते हैं और संतान सुख की कामना करते हैं।
धार्मिक मान्यता के अनुसार, काशी खंड, शिव पुराण, विष्णु पुराण और स्कंद पुराण में भी लोलार्क छठ का महत्व वर्णित है। स्कंद पुराण में लिखा गया है कि जब भगवान सूर्य का मन काशी के दर्शन के लिए लोल (चंचल) हुआ तो वे यहां लोलार्क नाम से प्रसिद्ध हुए। माना जाता है कि षष्ठी तिथि रविवार के योग में आने पर लोलार्क कुंड में स्नान और दर्शन से मनुष्य सभी पापों से मुक्त हो जाता है।
इतिहास और जनश्रुति के अनुसार, सदियों पहले इस स्थान पर एक विशाल उल्कापिंड गिरा था, जिससे इस कुंड का निर्माण हुआ। तब से यह स्थल आस्था और श्रद्धा का केंद्र बना हुआ है।
स्नान के बाद फल या सब्जी का त्याग
लोलार्क छठ पर एक और विशेष परंपरा निभाई जाती है। श्रद्धालु स्नान और पूजा के बाद एक फल या सब्जी का दान करते हैं और संकल्प लेते हैं कि मनोकामना पूरी होने तक वे उसका सेवन नहीं करेंगे। यही नहीं, कई लोग अपने वस्त्र भी वहीं छोड़ देते हैं।
श्रद्धालुओं की भीड़ से पूरा लोलार्क कुंड क्षेत्र गूंज उठा है। आस्था और विश्वास का यह अद्भुत संगम काशी में हर वर्ष की भांति इस बार भी एक अद्वितीय धार्मिक वातावरण का निर्माण कर रहा है।
