लालू प्रसाद यादव के सास-ससुर बिना टिकट पकड़े गए थे एसी कोच में, खुद लालू ने किया था स्वीकार – कहा, “टीटीई ने साहस दिखाया”  

नई दिल्ली/पटना। बिहार विधानसभा चुनाव के माहौल के बीच एक पुराना और दिलचस्प किस्सा फिर चर्चा में है — जब देश के तत्कालीन रेल मंत्री लालू प्रसाद यादव के सास-ससुर बिना टिकट एसी फर्स्ट क्लास में यात्रा करते हुए पकड़े गए थे। यह घटना फरवरी 2007 की है, जिसने उस समय लालू और उनके परिवार को मीडिया की सुर्खियों में ला दिया था।

जब रेल मंत्री के सास-ससुर चढ़े बिना टिकट ट्रेन में

लालू प्रसाद यादव उस समय यूपीए सरकार में रेल मंत्री थे और बिहार के सिवान से सांसद भी।
उनकी पत्नी राबड़ी देवी के माता-पिता — शिव प्रसाद चौधरी (ससुर) और महराजो देवी (सास) — हाजीपुर रेलवे स्टेशन से दरभंगा–नई दिल्ली संपर्क क्रांति एक्सप्रेस में सवार हुए थे। दोनों बुजुर्ग एसी फर्स्ट क्लास में यात्रा कर रहे थे और उनका गंतव्य सिवान था।

छपरा जंक्शन पर टीटीई ने पकड़ा

जब ट्रेन छपरा जंक्शन पहुंची, तो ईस्ट सेंट्रल रेलवे के टीटीई आलोक कुमार ने नियमित टिकट जांच की। जांच के दौरान यह पता चला कि दोनों यात्रियों के पास एसी फर्स्ट क्लास का वैध टिकट नहीं था।
जब टिकट मांगा गया, तो शिव प्रसाद चौधरी ने कहा —

“हमने कभी टिकट लेकर यात्रा नहीं की। हाजीपुर स्टेशन मास्टर ने खुद हमें ट्रेन में बैठाया था। दामाद (लालू) रेल मंत्री हैं, तो टिकट की क्या जरूरत?”

उनकी पत्नी महराजो देवी ने भी यही बात दोहराई। उन्होंने बताया कि उन्हें “विशेष सुविधा” दी गई थी।

खबर लीक होते ही मचा बवाल

ट्रेन में मौजूद एक सहयात्री ने घटना की सूचना स्थानीय पत्रकारों को दी।
सिवान स्टेशन पहुंचते ही मीडिया ने दंपति से बात की, जहां उन्होंने दावा किया कि “टिकट बनवा लिया था।”
हालांकि, टीटीई ने तुरंत नियमों के अनुसार जुर्माना वसूला, जो ₹500 था।
रेलवे के वरिष्ठ अधिकारी देवमणि दुबे ने भी पुष्टि की कि यह “नियमों का उल्लंघन” है और “रेल मंत्री का रिश्ता होने से कोई छूट नहीं दी जा सकती।”

लालू प्रसाद यादव ने मानी गलती

15 फरवरी 2007 को रेल भवन (नई दिल्ली) में पत्रकारों से बातचीत के दौरान लालू प्रसाद यादव ने खुद इस घटना को स्वीकार किया।
उन्होंने कहा —

“हां, मेरे सास-ससुर बिना टिकट एसी कोच में पकड़े गए थे। टीटीई ने हिम्मत दिखाई और तुरंत जुर्माना वसूला। यह सराहनीय है और दूसरों के लिए सबक होना चाहिए।”

विवाद पर जनता की प्रतिक्रिया

इस घटना ने उस वक्त सोशल मीडिया और अखबारों में हलचल मचा दी थी।
कई लोगों ने टीटीई की ईमानदारी की तारीफ की, तो वहीं कुछ ने इसे लालू के “हास्यपूर्ण लेकिन जवाबदेह” अंदाज़ का उदाहरण बताया।

रेल मंत्री के परिवार से जुड़ी यह घटना भले ही पुराने समय की हो, लेकिन आज भी यह प्रशासनिक जवाबदेही और ईमानदारी का प्रतीक बनकर याद की जाती है — जहां नियम सबके लिए समान साबित हुए, चाहे वह “रेल मंत्री के सास-ससुर” ही क्यों न हों।

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