Kiru hydropower corruption case: पूर्व जम्मू-कश्मीर राज्यपाल सत्यपाल मलिक के खिलाफ सीबीआई ने दाखिल की चार्जशीट

नई दिल्ली। केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) ने किरू हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट में कथित भ्रष्टाचार के मामले में पूर्व जम्मू-कश्मीर के राज्यपाल सत्यपाल मलिक और पांच अन्य के खिलाफ चार्जशीट दाखिल कर दी है। अधिकारियों ने गुरुवार को इसकी जानकारी दी।

करीब ₹2,200 करोड़ के सिविल वर्क्स कॉन्ट्रैक्ट में गड़बड़ी को लेकर यह कार्रवाई तीन साल की जांच के बाद की गई है। सीबीआई ने विशेष अदालत के समक्ष अपनी रिपोर्ट पेश की है, जिसमें मलिक और अन्य आरोपियों के नाम शामिल हैं।

गुरुवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ (पूर्व में ट्विटर) पर सत्यपाल मलिक ने जानकारी दी कि वह अस्पताल में भर्ती हैं और इस समय किसी से बात करने की स्थिति में नहीं हैं। उन्होंने यह भी कहा कि उन्हें शुभचिंतकों के कई फोन आ रहे हैं, लेकिन वह उनका उत्तर नहीं दे पा रहे हैं।

गौरतलब है कि सीबीआई ने फरवरी 2024 में सत्यपाल मलिक और अन्य आरोपियों के ठिकानों पर तलाशी अभियान चलाया था।
इससे पहले 2022 में प्राथमिकी दर्ज करते हुए CBI ने बताया था कि यह मामला किरू हाइड्रो इलेक्ट्रिक पावर प्रोजेक्ट (HEP) के सिविल वर्क्स के ठेके में अनियमितताओं से जुड़ा है। यह ठेका 2019 में एक निजी कंपनी को दिया गया था।

सत्यपाल मलिक, जो 23 अगस्त 2018 से 30 अक्टूबर 2019 तक जम्मू-कश्मीर के राज्यपाल रहे, ने पहले दावा किया था कि उन्हें इस प्रोजेक्ट और एक अन्य फाइल को मंजूरी देने के लिए ₹300 करोड़ की रिश्वत की पेशकश की गई थी।

CBI की कार्रवाई के बाद मलिक ने कहा था कि,
“मेरे घर पर छापा मारने से कुछ नहीं मिलेगा, सिर्फ 4-5 कुर्ते और पायजामे मिलेंगे। जिन लोगों के खिलाफ मैंने शिकायत की थी, जांच उनकी होनी चाहिए थी। तानाशाह मुझे डरा नहीं सकता, मैं किसान का बेटा हूं, न झुकूंगा, न डरूंगा।”

CBI ने इस मामले में चेनाब वैली पावर प्रोजेक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड (CVPPPL) के तत्कालीन अध्यक्ष नवीन कुमार चौधरी, अधिकारियों एमएस बाबू, एमके मित्तल, अरुण कुमार मिश्रा और कंस्ट्रक्शन कंपनी पटेल इंजीनियरिंग लिमिटेड को भी आरोपी बनाया है।

एफआईआर के अनुसार,
“CVPPPL की 47वीं बोर्ड बैठक में ई-टेंडरिंग और रिवर्स ऑक्शन के माध्यम से दोबारा टेंडर निकालने का निर्णय लिया गया था, लेकिन 48वीं बोर्ड बैठक में इसे लागू नहीं किया गया और अंततः ठेका पटेल इंजीनियरिंग लिमिटेड को दे दिया गया।”

अब इस मामले में कानूनी प्रक्रिया तेजी से आगे बढ़ने की संभावना है और यह देखना दिलचस्प होगा कि आने वाले दिनों में जांच और न्यायालय क्या रुख अपनाते हैं।

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