खाटू श्याम लक्खी मेला 21 से 28 फरवरी तक, लाखों श्रद्धालुओं के आगमन की संभावना

ऐलनाबाद, 20 फरवरी (डॉ. एम.पी. भार्गव): विश्व प्रसिद्ध खाटू श्याम मंदिर में फाल्गुनी लक्खी मेले का आयोजन 21 फरवरी से 28 फरवरी 2026 तक किया जाएगा। इस पावन मेले को लेकर प्रशासन और श्री श्याम मंदिर कमेटी ने श्रद्धालुओं की सुविधा, सुरक्षा और सुगम दर्शन के लिए व्यापक तैयारियां पूरी कर ली हैं। इस बार रिकॉर्ड संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना को देखते हुए विशेष प्रबंध किए गए हैं।

दर्शन व्यवस्था के लिए बनाए गए विशेष ब्लॉक

भक्तों को बाबा श्याम के दर्शन के लिए खाटूधाम कस्बे में बनाए गए 6 प्रमुख ब्लॉकों से होकर गुजरना होगा। श्रद्धालुओं को मुख्य द्वार तक पहुंचने के लिए कई किलोमीटर पैदल चलना पड़ेगा। पूरे क्षेत्र को 6 ब्लॉकों में विभाजित किया गया है, जहां से भक्त 40 फीट चौड़े मार्ग तक पहुंचेंगे और फिर 75 फीट चौड़े तथा 14 लाइनों वाले मुख्य मेला ग्राउंड में प्रवेश करेंगे।

भीड़ के बढ़ते दबाव को देखते हुए चारण मेला मैदान में इस बार एक अतिरिक्त ब्लॉक जोड़कर कुल 7 ब्लॉक बनाए गए हैं, जबकि पिछले वर्ष यहां 6 ब्लॉक ही थे।

रींगस से खाटूधाम तक 38 किलोमीटर पैदल यात्रा

मेले के दौरान भीड़ प्रबंधन के लिए रींगस रोड स्थित श्याम वाटिका के पीछे लगभग 40 बीघा भूमि पर तीन अतिरिक्त बैकअप ब्लॉक बनाए गए हैं। इनका उपयोग तब किया जाएगा जब श्रद्धालुओं की संख्या निर्धारित क्षमता से अधिक हो जाएगी। पदयात्रियों को रींगस से खाटूधाम तक लगभग 38 किलोमीटर की पैदल यात्रा करनी होगी। श्रद्धालुओं की सुरक्षा के लिए इस पूरे मार्ग को ‘नो व्हीकल्स जोन’ घोषित किया जाएगा।

लाखों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है खाटूधाम

राजस्थान के सीकर जिले में स्थित खाटू श्याम बाबा का दरबार देश-विदेश में प्रसिद्ध है। हर वर्ष फाल्गुन शुक्ल प्रतिपदा से द्वादशी तक यहां भव्य लक्खी मेला लगता है, जिसमें लाखों श्रद्धालु बाबा को गुलाल अर्पित कर अपनी मनोकामनाएं मांगते हैं। मान्यता है कि बाबा खाटू श्याम अपने भक्तों की हर मनोकामना पूरी करते हैं और उन्हें संकटों से मुक्ति दिलाते हैं।

बर्बरीक की कथा से जुड़ी है लक्खी मेले की परंपरा

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार फाल्गुन मास की द्वादशी तिथि को महाभारत काल में भीम के पौत्र और घटोत्कच के पुत्र बर्बरीक ने भगवान श्रीकृष्ण के कहने पर अपना सिर दान कर दिया था। उनकी इस महान त्याग भावना से प्रसन्न होकर भगवान श्रीकृष्ण ने उन्हें कलियुग में अपने नाम से पूजे जाने का आशीर्वाद दिया। तभी से बर्बरीक बाबा खाटू श्याम के नाम से प्रसिद्ध हुए और उनके सम्मान में हर वर्ष लक्खी मेले का आयोजन किया जाता है।

प्रशासन ने श्रद्धालुओं से अपील की है कि वे निर्धारित मार्गों और सुरक्षा निर्देशों का पालन करते हुए दर्शन करें, ताकि मेले का आयोजन शांतिपूर्ण और सुव्यवस्थित तरीके से संपन्न हो सके।

 

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