नई दिल्ली। आज के समय में बांझपन (इंफर्टिलिटी) एक बड़ी स्वास्थ्य समस्या बनती जा रही है। World Health Organization के अनुसार दुनिया भर में करीब 15 प्रतिशत दंपत्ति इस समस्या से जूझ रहे हैं। ऐसे में माता-पिता बनने के लिए कई लोग IVF का सहारा लेते हैं, लेकिन IUI भी एक प्रभावी विकल्प है, जिसके बारे में जानकारी होना जरूरी है।
विशेषज्ञ डॉ. उमेश जिंदल बताते हैं कि आधुनिक प्रजनन चिकित्सा में IUI (इंट्रायूटेरिन इनसेमिनेशन) और IVF (इन विट्रो फर्टिलाइजेशन) दो प्रमुख उपचार हैं, जो अलग-अलग परिस्थितियों में उपयोगी साबित होते हैं।
बांझपन के कारण और जांच
डॉ. जिंदल के अनुसार, बांझपन के कई कारण हो सकते हैं। महिलाओं में ओव्यूलेशन की समस्या, PCOS, एंडोमेट्रियोसिस या फेलोपियन ट्यूब का बंद होना प्रमुख कारण हैं। वहीं पुरुषों में कम स्पर्म काउंट या कमजोर गतिशीलता भी गर्भधारण में बाधा बनती है। सही कारण जानने के लिए हार्मोन टेस्ट, अल्ट्रासाउंड और वीर्य जांच कराई जाती है।
IUI क्या है?
IUI एक सरल और कम जटिल प्रक्रिया है। इसमें डॉक्टर तैयार किए गए स्वस्थ शुक्राणुओं को सीधे महिला के गर्भाशय में डालते हैं, जिससे गर्भधारण की संभावना बढ़ती है। यह तरीका उन दंपत्तियों के लिए उपयुक्त होता है, जहां समस्या हल्की हो या कारण स्पष्ट न हो। एक IUI चक्र में सफलता दर लगभग 5 से 20 प्रतिशत तक होती है।
IVF कैसे अलग है?
IVF एक उन्नत तकनीक है, जिसमें महिला के अंडों और पुरुष के शुक्राणुओं को लैब में मिलाकर भ्रूण तैयार किया जाता है और फिर उसे गर्भाशय में स्थापित किया जाता है। यह प्रक्रिया उन मामलों में ज्यादा कारगर होती है, जहां ट्यूब ब्लॉक हो, स्पर्म की समस्या गंभीर हो या लंबे समय से गर्भधारण नहीं हो पा रहा हो। 35 वर्ष से कम उम्र की महिलाओं में IVF की सफलता दर 40 से 50 प्रतिशत तक हो सकती है।
कौन सा इलाज बेहतर?
विशेषज्ञों के अनुसार, यदि समस्या हल्की है तो शुरुआत IUI से की जाती है, क्योंकि यह कम खर्चीला और आसान होता है। वहीं गंभीर मामलों या IUI के असफल होने पर IVF बेहतर विकल्प माना जाता है। उपचार का चयन करते समय महिला की उम्र, मेडिकल रिपोर्ट और दंपत्ति की स्थिति को ध्यान में रखा जाता है।
भावनात्मक और आर्थिक पहलू भी अहम
फर्टिलिटी ट्रीटमेंट केवल मेडिकल फैसला नहीं होता, इसमें भावनात्मक और आर्थिक पहलू भी जुड़े होते हैं। IVF महंगा और जटिल होता है, जबकि IUI सरल लेकिन कम सफलता दर वाला होता है। ऐसे में सही काउंसलिंग और जानकारी के आधार पर ही निर्णय लेना जरूरी है।
विशेषज्ञों का मानना है कि सही समय पर सही उपचार और सकारात्मक सोच के साथ दंपत्ति माता-पिता बनने के अपने सपने को साकार कर सकते हैं।
Disclaimer: यह लेख केवल सामान्य जानकारी के लिए है. इस तरह की किसी भी जानकारी पर अमल करने से पहले डॉक्टर या किसी विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें
