मध्य पूर्व में ईरान और अमेरिका-इजरायल के बीच जारी तनाव के बीच खाड़ी क्षेत्र में हालात और गंभीर होते जा रहे हैं। रविवार को ईरान की ओर से बहरीन पर कई मिसाइल और ड्रोन हमले किए गए। बहरीन ने दावा किया है कि इन हमलों में एक समुद्री पानी को पीने योग्य बनाने वाले डीसैलिनेशन प्लांट को भी निशाना बनाया गया।
युद्ध अब नौवें दिन में प्रवेश कर चुका है और यह पहली बार है जब किसी अरब देश ने सार्वजनिक रूप से कहा है कि ईरान ने डीसैलिनेशन प्लांट पर हमला किया है। फारस की खाड़ी के तट पर सैकड़ों डीसैलिनेशन प्लांट मौजूद हैं, जिन पर सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात, कतर, कुवैत और अन्य खाड़ी देश अपने पीने के पानी की जरूरतों के लिए काफी हद तक निर्भर हैं।
बहरीन के गृह मंत्रालय के अनुसार ईरानी ड्रोन हमले में एक वॉटर डीसैलिनेशन प्लांट को नुकसान पहुंचा है। हालांकि देश की वॉटर अथॉरिटी ने कहा कि इस हमले से फिलहाल पानी की सप्लाई पर कोई असर नहीं पड़ा है और स्थिति नियंत्रण में है।
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर ईरान इन डीसैलिनेशन प्लांट्स को लगातार निशाना बनाता है तो खाड़ी क्षेत्र में बड़ा जल संकट पैदा हो सकता है। कुवैत में करीब 90 प्रतिशत, ओमान में 86 प्रतिशत और सऊदी अरब में लगभग 70 प्रतिशत पीने का पानी समुद्री पानी को शुद्ध करके ही प्राप्त किया जाता है।
एक रिपोर्ट के मुताबिक खाड़ी देशों के लिए सबसे बड़ा खतरा तेल के ढांचे को नुकसान पहुंचना नहीं बल्कि डीसैलिनेशन प्लांट्स का तबाह होना है। अगर इन सुविधाओं पर बड़े पैमाने पर हमले हुए तो दुबई और रियाद जैसे बड़े शहरों में कुछ ही दिनों में पीने के पानी की कमी हो सकती है, जिससे गंभीर मानवीय संकट खड़ा हो सकता है।
