रामपुर में अवैध डग्गामारी चरम पर, मुख्यमंत्री के आदेश हवा में—पुलिस-ठेकेदार गठजोड़ से सिस्टम पर उठे सवाल
- रिपोर्ट: शाहबाज़ खान
रामपुर। जिले में अवैध डग्गामारी (बिना परमिट यात्रियों को ढोना) बेकाबू होती जा रही है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के कड़े निर्देशों के बावजूद यह धंधा धड़ल्ले से जारी है। शहर के अंबेडकर पार्क क्षेत्र से लेकर मुरादाबाद रोड, पनवड़िया चौराहा, माल गोदाम चौराहा, बिलासपुर गेट, बरेली गेट और पहाड़ी गेट—लगभग हर चौराहे पर डग्गामार वाहन खुलेआम सवारियां भरते दिखते हैं।
ठेकेदार और मुंशी खुलेआम पुलिस को दे रहे चुनौती
स्थानीय लोगों का आरोप है कि अवैध वाहन संचालक भारी भरकम वसूली कर रोजाना सवारियां ढो रहे हैं। वहीं पुलिस प्रशासन इस पर चुप्पी साधे बैठा है। आरोप यह भी है कि पुलिस मुंशी और कुछ ठेकेदारों की मिलीभगत से यह कारोबार फल-फूल रहा है।
प्रशासन की अनदेखी के कारण परिवहन विभाग को भी भारी आर्थिक नुकसान हो रहा है क्योंकि रोडवेज की बसों को यात्री नहीं मिल पा रहे।
सड़कों पर मौत का साया—स्कूल बस से बच्चे की मौत
अवैध व अनियंत्रित यातायात के कारण हादसे भी बढ़ रहे हैं। हाल ही में मिल्टन अकैडमी, बिलासपुर की बस से एक बच्चे की दर्दनाक मौत ने सिस्टम की लापरवाही को फिर उजागर कर दिया है।
कागजी कार्रवाई तक सीमित अभियान
पहले भी प्रशासन ने कुछ दिनों तक अभियान चलाकर कार्रवाई दिखाई थी, लेकिन वह केवल औपचारिकता बनकर रह गई। जैसे ही अभियान थमा, डग्गामारी का अवैध धंधा फिर वही लौट आया—और पहले से अधिक खतरनाक स्थिति में।
सवाल जनता के मन में—कब होगा इस अवैध नेटवर्क पर शिकंजा?
इतने अधिक पुलिस-चेक पोस्ट और लगातार पेट्रोलिंग के बावजूद अवैध वाहन सड़कों पर दौड़ रहे हैं—यह गंभीर सवाल खड़ा करता है कि आखिर संरक्षण किस स्तर तक मिल रहा है?
अब निगाहें प्रशासन पर
जनता और जागरूक नागरिक मांग कर रहे हैं कि:
अवैध डग्गामार वाहनों पर कड़ी कार्रवाई की जाए
पुलिस की जिम्मेदारी तय कर जवाबदेही सुनिश्चित हो
परिवहन और यातायात कानूनों का कड़ाई से पालन कराया जाए
यदि हालात यूं ही बने रहे तो यह मुद्दा हर दिन किसी बड़ी दुर्घटना और प्रशासनिक विफलता की कहानी दोहराता रहेगा।
