इस्लामाबाद।पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा और बलूचिस्तान प्रांतों में सक्रिय आतंकवादी संगठन तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP) पिछले तीन सालों में सैकड़ों पाकिस्तानी फौजियों की जान ले चुका है। अब संगठन ने 2026 के लिए नया ऑर्गनाइजेशनल स्ट्रक्चर तैयार किया है, जिससे पाकिस्तान की सेना और सुरक्षा बलों के लिए स्थिति और गंभीर होने वाली है।
TTP की नई योजनाएं
टीटीपी ने घोषणा की है कि वह अपनी एयर फ़ोर्स बनाने जा रहा है, जिससे उसके हमले अब केवल खैबर-पख्तूनख्वा तक सीमित नहीं रहेंगे। नए स्ट्रक्चर में TTP की मिलिट्री यूनिट्स और उनके प्रांतीय तैनाती के साथ अलग-अलग विभागों का विवरण शामिल है।
CNN-News18 के अनुसार, नवंबर 2022 में TTP ने पाकिस्तान सरकार के साथ बातचीत खत्म कर दी थी और इसके बाद से सुरक्षा बलों, पुलिस और सरकारी कर्मचारियों पर हमले तेज़ हो गए।
मिलिट्री और प्रशासनिक बदलाव
TTP ने अपने शैडो प्रांतों के लिए दो नए जोन बनाए हैं – पश्चिमी जोन (बलूचिस्तान) और सेंट्रल जोन। अब संगठन के नियंत्रण में कश्मीर और गिलगित-बाल्टिस्तान प्रांत भी शामिल किए गए हैं।
दक्षिणी मिलिट्री जोन का हेड: एहसानुल्लाह इपी
सेंट्रल मिलिट्री जोन का डिप्टी हेड: हिलाल गाजी
पॉलिटिकल कमीशन का लीडर: जमतुल्लाह महसूद
एयर फोर्स का नेतृत्व: सलीम हक्कानी
अंतरराष्ट्रीय प्रभाव
पाकिस्तान सरकार TTP को ‘फ़ितना-अल-ख्वारिज’ कहती है और इसे बैन कर चुकी है। TTP के अफगानिस्तान से समर्थन मिलने के कारण दोनों देशों के रिश्ते तनावपूर्ण हैं। पाकिस्तान का आरोप है कि TTP के लड़ाके अफगानिस्तान चले जाते हैं और वहां सुरक्षित रहते हैं। इस पर पाकिस्तान ने अफगानिस्तान में हवाई हमले भी किए थे।
अब TTP नए ढांचे और मिलिट्री रणनीति के साथ पाकिस्तान को चुनौती देने की तैयारी में है। विशेषज्ञों के अनुसार, इस कदम से सीमा सुरक्षा और आंतरिक सुरक्षा की स्थिति और जटिल हो सकती है।
