भोपाल/जबलपुर: भारत में सोने की खदानों की सूची में अब मध्य प्रदेश का जबलपुर जिला भी शामिल होने जा रहा है। भूवैज्ञानिकों ने जबलपुर जिले की सतह के नीचे महत्वपूर्ण स्वर्ण भंडार की मौजूदगी की पुष्टि की है। यह सोने का भंडार लगभग 100 हेक्टेयर क्षेत्र में फैला हुआ है और इसकी मात्रा लाखों टन तक हो सकती है।
इस महत्वपूर्ण खोज से भारत में स्वर्ण उत्पादन को एक नई दिशा मिलने की संभावना है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर इस भंडार का व्यावसायिक रूप से दोहन किया गया, तो यह देश की अर्थव्यवस्था और स्थानीय रोजगार दोनों को मजबूती देगा।
भारत में स्वर्ण भंडार की स्थिति
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, 31 मार्च 2025 तक भारत में सोने का कुल अनुमानित भंडार 879.58 मीट्रिक टन है। भारत में पहले से ही कई प्रमुख सोने की खदानें मौजूद हैं:
हट्टी गोल्ड माइंस (कर्नाटक, रायचूर):
भारत की सबसे पुरानी और सबसे बड़ी खदान, जो सालाना लगभग 1.8 टन सोने का उत्पादन करती है। इसका इतिहास 2,000 वर्षों पुराना है।
कोलार गोल्ड फील्ड्स (केजीएफ):
कर्नाटक के कोलार जिले में स्थित यह खदान कभी दुनिया की दूसरी सबसे गहरी खदान मानी जाती थी।
सोनभद्र स्वर्ण खदान (उत्तर प्रदेश):
वर्ष 2020 में खोजा गया यह स्वर्ण क्षेत्र उत्तर भारत के लिए खास महत्व रखता है।
रामगिरी स्वर्ण क्षेत्र (आंध्र प्रदेश):
चित्तूर जिले में स्थित यह क्षेत्र विजयनगर साम्राज्य के समय से सोने के लिए प्रसिद्ध है।
पारसी स्वर्ण खदान (झारखंड):
पूर्वी सिंहभूम जिले की यह खदान भले ही बड़ी न हो, लेकिन तांबे और अन्य खनिजों के लिए प्रसिद्ध है।
गडग स्वर्ण खदान (कर्नाटक) और
चिगरगुंटा-बिसनाथम खदान (आंध्र प्रदेश) भी सोने की छोटी लेकिन सक्रिय खदानों में शामिल हैं।
संभावनाओं का नया द्वार
जबलपुर में मिले इस नए स्वर्ण भंडार से उम्मीद की जा रही है कि यह भारत की सोने के आयात पर निर्भरता को कम कर सकेगा और घरेलू उत्पादन को बढ़ावा मिलेगा।
राज्य सरकार और भारतीय खान ब्यूरो (GSI) के सहयोग से अब इस क्षेत्र में खनन कार्य शुरू करने की दिशा में कदम बढ़ाए जा रहे हैं।
यह खोज न सिर्फ मध्य प्रदेश बल्कि पूरे देश के लिए आर्थिक दृष्टि से एक महत्वपूर्ण उपलब्धि मानी जा रही है।
