एचपीएससी की 35 प्रतिशत कटऑफ नीति से युवाओं के भविष्य पर संकट: कुमारी सैलजा
— योग्य अभ्यर्थियों को किया जा रहा है बाहर — हरियाणा के युवाओं के साथ धोखा, आरक्षण व्यवस्था पर सीधा प्रहार
ऐलनाबाद, हरियाणा | 22 जनवरी (एम. पी. भार्गव) हरियाणा लोक सेवा आयोग (एचपीएससी) द्वारा भर्तियों में लागू की गई 35 प्रतिशत न्यूनतम अंक (कटऑफ) नीति को लेकर कड़ा विरोध सामने आया है। सिरसा से सांसद, कांग्रेस कमेटी की महासचिव एवं पूर्व केंद्रीय मंत्री कुमारी सैलजा ने इस नीति को हरियाणा के युवाओं के साथ अन्याय करार देते हुए कहा कि यह व्यवस्था चयन की नहीं, बल्कि योग्य अभ्यर्थियों को बाहर करने का माध्यम बन चुकी है।
कुमारी सैलजा ने कहा कि इस नीति के कारण हजारों पद खाली पड़े हैं, जबकि योग्य और पात्र उम्मीदवार उपलब्ध हैं। परिणामस्वरूप, प्रदेश का युवा बेरोजगारी की मार झेलने को मजबूर है। उन्होंने कहा कि उपलब्ध आंकड़े स्पष्ट करते हैं कि कई विषयों में पात्र उम्मीदवार मौजूद होने के बावजूद नियुक्तियां नहीं की जा रही हैं। सैकड़ों-हजारों स्वीकृत पदों के बावजूद गिनती के लोगों का चयन होना शिक्षा व्यवस्था और प्रशासन—दोनों के लिए घातक है।
उन्होंने सवाल उठाया कि जब पद भी हैं, उम्मीदवार भी हैं और जरूरत भी है, तो फिर भर्तियां क्यों रोकी जा रही हैं? सांसद ने आरोप लगाया कि 35 प्रतिशत न्यूनतम अंकों की बाध्यता का सबसे अधिक नुकसान आरक्षित वर्गों को हो रहा है। पिछड़ा वर्ग, अनुसूचित जाति, अत्यंत पिछड़ा वर्ग और आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के अंतर्गत बड़ी संख्या में पद रिक्त पड़े हैं।
कुमारी सैलजा ने कहा कि सरकार युवाओं के साथ धोखा कर रही है और यह नीति आरक्षण व्यवस्था पर सीधा प्रहार है। उन्होंने आरोप लगाया कि आरक्षण को व्यवहार में निष्क्रिय कर दिया गया है और वह केवल कागजों तक सीमित रह गया है, जो सामाजिक न्याय की भावना के खिलाफ है।
सांसद ने कहा कि आयोग इस नीति को योग्यता के नाम पर सही ठहराने की कोशिश कर रहा है, जबकि वास्तविक योग्यता का अर्थ उपलब्ध उम्मीदवारों में से सर्वश्रेष्ठ का चयन होता है। किसी तय प्रतिशत को थोपकर योग्य अभ्यर्थियों को बाहर कर देना चयन नहीं, बल्कि बहिष्कार है। इससे न केवल युवाओं का मनोबल टूट रहा है, बल्कि सरकारी संस्थानों में वर्षों से चली आ रही रिक्त पदों की समस्या और गंभीर होती जा रही है।
कुमारी सैलजा ने सरकार से मांग की कि इस जनविरोधी नीति पर तत्काल पुनर्विचार किया जाए, न्यूनतम अंक की बाध्यता समाप्त की जाए, मूल्यांकन प्रक्रिया को पारदर्शी बनाया जाए और लंबे समय से खाली पड़े सभी पदों को शीघ्र भरा जाए। उन्होंने कहा कि हरियाणा का युवा मेहनती और प्रतिभाशाली है; उसे अवसर देने की जरूरत है, न कि नीतियों के जाल में उलझाकर उसका भविष्य छीना जाए।
उन्होंने स्पष्ट किया कि युवाओं और आरक्षण के अधिकारों की रक्षा के लिए वह यह लड़ाई लगातार जारी रखेंगी।
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