कइसे खेलन जइबू सावन में कजरिया- डॉ उषा कनक पाठक

पावस महिला काव्य गोष्ठी का हुआ आयोजनसांस्कृतिक विरासत को संजोए रखना सराहनीय - नीलम देवी

मिर्जापुर। राष्ट्र कवि मैथिली शरण गुप्त की जयंती पर हिंदी श्री साहित्य संस्थान के तत्वावधान में अनगढ़ स्थिति एक हाल में पावस महिला काव्य गोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की मुख्य अतिथि उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा सम्मानित साहित्यकार डॉ उषा कनक पाठक रहीं। कार्यक्रम की अध्यक्षता गाजीपुर से आयी हिंदी श्री की संरक्षक नीलम देवी ने किया। संचालन कवयित्री व लेखिका सृष्टि राज ने किया।

मुख्य अतिथि व अध्यक्ष ने मां सरस्वती की प्रतिमा पर दीप प्रज्वलित करके कार्यक्रम का शुभारंभ किया। सरस्वती वंदना की प्रस्तुति वंदना गुप्ता ने की। मुख्य अतिथि डॉ उषा कनक पाठक ने अपने वक्तव्य में कहा कि पावस काव्य गोष्ठी में आकर प्रसन्नता हुई। कार्यक्रम उच्चकोटी का था। कजरी मिर्जापुर की पहचान है और विशेष रूप से सावन में गाई जाती है। मुख्य अतिथि ने सुनाया कइसे खेलन जइबू सावन में कजरिया। अध्यक्षता कर रही नीलम देवी ने कहा कि सावन माह धार्मिक और प्राकृतिक दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण है। ऐसे में पावस महिला काव्य गोष्ठी के माध्यम से सांस्कृतिक विरासत को संजोए रखना सराहनीय है।

नंदिनी वर्मा ने सुनाया चला देखी आई सावन के मेला सखी। बड़ा मन करेला सखी। इला जायसवाल ने सुनाया हरे रामा रिमझिम बरसे पनिया, कि झूले राधा रनिया ए हरी। कल्पना गुप्ता ने सुनाया बहुतय दर्द होला कृष्ण कन्हैया, कलाई जिन मरोड़ा हे बनवारी।

कार्यक्रम में सुमन, सावित्री कुमारी, अमिका सिंह, दिव्या सिंह, उर्मिला, साधना पाठक, मोहिनी, तान्या कुलश्रेष्ठ, नुसरत जमाल, पूनम सिंह, पूनम, प्रीति सोनकर, चंदा देवी, साधना वर्मा ने कजरी गीत सुनाया। कार्यक्रम के अंत में सावित्री कुमारी ने सभी का धन्यवाद प्रकट किया।

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