नई दिल्ली, मार्च, 2026: हम अक्सर सोचते हैं कि अच्छे खाने की आदत घर से शुरू होती है, लेकिन यह शत-प्रतिशत सही नहीं है, क्योंकि बच्चे जो सीखते हैं, वही आगे उनकी जिंदगी का हिस्सा बनता है और सबसे अधिक बच्चे स्कूल में सीखते हैं। ऐसे में, अब यह समझ बढ़ रही है कि सही खानपान की आदतें सबसे अधिक स्कूल से ही बनती हैं।
नई दिल्ली में “नरिशिंग स्कूल्स फाउंडेशन” के न्यूट्रिशन कॉन्क्लेव में इसी मुद्दे पर खुलकर बात हुई। विशेषज्ञों ने कहा कि यदि बच्चों को छोटी उम्र से ही सही खानपान के बारे में सिखाया जाए, तो कुपोषण और बढ़ती लाइफस्टाइल बीमारियों दोनों से निपटा जा सकता है। इसी जरूरत को ध्यान में रखते हुए यह बात सामने आई कि स्कूलों में पोषण शिक्षा को पढ़ाई का जरूरी हिस्सा बनाया जाना चाहिए। अभी हालत यह है कि कहीं बच्चों को सही पोषण नहीं मिल रहा, तो कहीं मोटापा और डायबिटीज जैसी समस्याएँ कम उम्र में ही दिखने लगी हैं।
भारत सरकार की पूर्व सचिव आरती आहूजा ने कहा कि हमें खाने को लेकर अपनी समझ को फिर से मजबूत करना होगा और अलग-अलग क्षेत्रों को मिलकर काम करना होगा, ताकि इसका असर जमीन पर दिखे।
वहीं, नरिशिंग स्कूल्स फाउंडेशन की को-फाउंडर और सीईओ अर्चना सिन्हा ने कहा कि बच्चे आज जो सीखेंगे, वही उनकी कल की आदत बनेगी, इसलिए स्कूल बदलाव की सबसे सही जगह हैं। कॉन्क्लेव में यह भी बात सामने आई कि सिर्फ खाना उपलब्ध कराना काफी नहीं है, बल्कि बच्चों की आदतों में बदलाव लाना ज्यादा जरूरी है। इसके लिए एक्टिविटी आधारित पढ़ाई, स्कूल प्रोग्राम और समाज की भागीदारी अहम् भूमिका निभा सकती है।
कुल मिलाकर, यह स्पष्ट है कि यदि कक्षाओं में सही सीख दी जाए, तो आने वाली पीढ़ी खुद भी स्वस्थ रहेगी और दूसरों को भी स्वस्थ रहने के लिए प्रेरित करेगी।
