जन्म दिन मुबारक अटल बिहारी वाजपेयी जी, हरियाणा से आपका ख़ास लगाव था

इमरजेंसी का अब भी समर्थन करने वालों से किसी भी सूरत में समझौता नहीं होगा- वाजपेयी राष्ट्रीय पार्टियाँ क्षेत्रीय भावनाओं को समझने में असफल

गुस्ताख़ी माफ़ हरियाणा – पवन कुमार बंसल

हैप्पी बर्थडे अटल जी। पूरा देश पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी का जन्मदिन मना रहा है। गृह मंत्री अमित शाह पंचकुला में वाजपेयी की प्रतिमा का अनावरण कर रहे हैं।

वाजपेयी जी का हरियाणा के नेताओं, लोगों और पत्रकारों से खास लगाव था। इस लेखक को भी पत्रकार के नाते उनके हरियाणा दौरों के दौरान कई बार उनसे बात करने का अवसर मिला। पूर्व उपप्रधानमंत्री देवीलाल से उनकी खास पटती थी। वे उनके प्रशंसक थे, यह अलग बात है कि 1990 में मेहम विधानसभा सीट के उपचुनाव में हुई हिंसा से दुखी होकर वाजपेयी ने कहा था कि मेहम हमारे खूबसूरत लोकतंत्र के चेहरे पर बदनुमा धब्बा है।

हरियाणा विकास पार्टी के अध्यक्ष बंसी लाल ने इमरजेंसी का समर्थन

पूर्व मुख्यमंत्री बंसीलाल को वे पसंद नहीं करते थे। एक बार मेहम में प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान हरियाणा विकास पार्टी के अध्यक्ष बंसी लाल ने इमरजेंसी का समर्थन कर दिया था। कुछ दिन बाद वाजपेयी रोहतक आए थे उस दौरान रोहतक के कैनाल रेस्ट हाउस में इस लेखक ने, जो तब जनसत्ता अखबार का संवाददाता था, उनसे पूछा था कि क्या उनकी पार्टी बंसी लाल से चुनावी तालमेल करेगी।

वाजपेयी ने इस लेखक को साफ शब्दों में कहा था कि इमरजेंसी का अब भी समर्थन करने वालों से किसी भी सूरत में समझौता नहीं होगा। लेकिन आडवाणी, नरेंद्र मोदी और सुषमा स्वराज ने बंसी लाल से समझौता करवा दिया।

जब 1996 के विधानसभा चुनाव में भाजपा का बंसी लाल की हरियाणा विकास पार्टी से समझौता हुआ और सरकार बनी तब बंसी लाल ने सुषमा स्वराज के पति स्वराज कौशल को हरियाणा से राज्यसभा का सदस्य भी बनवाया था। बाद में भाजपा ने वाजपेयी के आशीर्वाद से बंसी लाल की सरकार तुड़वा दी। वह भी तब, जब करगिल से हरियाणा के जवानों के शव आ रहे थे।

खैर, आज तो जन्मदिन है। मुबारक बनती है। उसका ज़िक्र फिर कभी करेंगे।

प्योर और इम्प्योर

हरियाणा की राजनीति पर मेरी पहली किताब हरियाणा के लालों के सबरंगे किस्से से साभार।

उन दिनों मैं जींद में इंडियन एक्सप्रेस अखबार का रिपोर्टर था। 1982 के विधानसभा चुनाव नज़दीक थे। जींद में एक कार्यकर्ता मीटिंग में वाजपेयी लोकदल से गठजोड़ की चर्चा कर रहे थे। वे कहने लगे कि देवीलाल मुझसे कहते हैं कि पिछले चुनाव में आपकी पार्टी के कम विधायक जीते थे, इसलिए आपको थोड़ी सीटें मिलेंगी।

यह सुनकर टिकट के इच्छुक कार्यकर्ताओं के होश उड़ गए, कम सीटें मिलेंगी तो उनका नंबर कैसे आएगा? फिर हँसते हुए वाजपेयी ने कहा कि मैंने देवीलाल से कह दिया कि यह ठीक है आपके ज़्यादा जीते, लेकिन आपके साथ कितने रहे? आपके विधायकों को तो भजन लाल ले गए। हमारे थोड़े जीते, लेकिन पार्टी तो नहीं छोड़ी। हमारा माल प्योर है और आपका इम्प्योर।

फिर वाजपेयी ने कहा कि वैसे हमारी पार्टी में भी एक-आध इम्प्योर माल है। उनका इशारा अपनी पार्टी के उन विधायकों की ओर था, जो पार्टी में रहते हुए भजन लाल के पेरोल पर थे। भजन लाल भाजपा के विधायकों को पटा कर रखते थे।

राष्ट्रीय पार्टियाँ क्षेत्रीय भावनाओं को समझने में असफल

वाजपेयी जी 36 साल पहले नरवाना आए थे। तब भाजपा नेता नरवाना के दीवान लक्ष्मण उन्हें मुंबई से अपने साथ लेकर आए थे। लेखक उस समय जींद में इंडियन एक्सप्रेस का रिपोर्टर था। लेखक ने वाजपेयी से पूछा था कि राष्ट्रीय पार्टियों की बजाय राज्यों में क्षेत्रीय दल क्यों सत्ता में आ रहे हैं?

वाजपेयी ने कहा था कि राष्ट्रीय पार्टियाँ क्षेत्रीय भावनाओं का सम्मान करने में असफल रही हैं। राजनीति में क्षेत्रीय पार्टियों की भूमिका रहेगी लेकिन अब नरेंद्र मोदी ने क्षेत्रीय पार्टियों को रगड़ा लगा दिया है।

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