गुस्ताख़ी माफ़ हरियाणा – पवन कुमार बंसल
हरियाणवी नेताओं के खानपान पर लिखी मेरी पोस्ट के बाद कई पाठकों ने पूछा कि मेरा खुद का खानपान क्या है, जो सत्तर वर्ष की उम्र में भी मैं इतना सक्रिय हूँ।
तो बता दूँ—दिल की बीमारी, प्रोस्टेट ग्लैंड की समस्या, एसिडिटी और डायबिटीज़ जैसी परेशानियों के बावजूद मेरी दिनचर्या काफ़ी नियमित है। मैं रात को लगभग दस बजे सो जाता हूँ और सुबह दो बजे उठ जाता हूँ।
उठते ही अदरक और तुलसी वाली फीकी चाय पीता हूँ। इसके बाद करीब तीन घंटे तक कबीर और आबिदा परवीन को सुनते हुए लेखन करता हूँ।
फिर बागवानी, मॉर्निंग वॉक और योग करता हूँ।
खानपान बेहद सादा है—दिन में तीन बार दो रूखी रोटी, दाल या सब्ज़ी, साथ में चटनी और मुक्की मारकर प्याज़। तीनों समय शुगर-फ्री चाय बिस्किट के साथ लेता हूँ।
कभी-कभार बीयर या ओल्ड मोंक भी हो जाती है।
मौसमी फल और भरपूर पानी मेरी दिनचर्या का हिस्सा हैं—जैसे अमरूद, केला, बूंदी और बेसन के लड्डू पसंद i दुमछला i “मज़ाक में कहा जाता है कि बंसल को न तो धमकाया जा सकता है और न ही खरीदा जा सकता है, लेकिन अगर कोई उन्हें फूल या पौधे दे दे, तो उनकी कलम ज़रूर नरम पड़ सकती है।
मैं तो खुलकर कहता हूँ—आप इसे भ्रष्टाचार कह लें, लेकिन मुझे फूल और पौधे खुशी-खुशी स्वीकार हैं। मुझे कला-कृतियाँ भी बहुत पसंद हैं।”
