जयपुर, मार्च 2026 : साइटसेवर्स इंडिया ने एबवी थेराप्यूटिक्स इंडिया प्राइवेट लिमिटेड के साथ मिलकर राजस्थान के जयपुर में एक राज्य-स्तरीय परामर्श बैठक आयोजित की। यह बैठक ग्लूकोमा से होने वाली दृष्टिहीनता को कम करने और देशव्यापी जागरूकता अभियान को आगे बढ़ाने पर केंद्रित रही। यह पहल विभिन्न शहरों में चल रही मुहिम का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य लोगों में जागरूकता बढ़ाना, समय पर जाँच को प्रोत्साहित करना और दृष्टिहीनता के एक बड़े कारण को रोकना है।
यह परामर्श बैठक हिल्टन जयपुर, गीजगढ़ हाउस में आयोजित हुई, जिसमें नेत्र रोग विशेषज्ञों, नीति निर्माताओं, पब्लिक हेल्थ प्रोफेशनल्स और सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। सभी ने मिलकर क्षेत्र में ग्लूकोमा की स्थिति का आकलन किया और जागरूकता एवं समय पर पहचान के लिए रणनीतियों पर चर्चा की।
गौरतलब है कि पिछले वर्ष नई दिल्ली में पाँच राज्य-स्तरीय और एक राष्ट्रीय स्तर की परामर्श बैठक आयोजित की गई थीं। वर्ष 2026 की यह मुहिम उसी आधार को आगे बढ़ा रही है। जयपुर की बैठक ने स्थानीय विशेषज्ञों और संबंधित पक्षों को एक मंच पर लाकर जानकारी साझा करने, कमियों की पहचान करने और राजस्थान में नेत्र देखभाल को मजबूत बनाने का अवसर प्रदान किया।
बैठक में ग्लूकोमा के जोखिम कारकों, समय पर पहचान की अहमियत और नियमित आँखों की जाँच की आवश्यकता पर विस्तार से चर्चा की गई। कार्यक्रम स्थल पर पोर्टेबल डायग्नोस्टिक टूल्स से लैस जाँच काउंटर भी लगाए गए, जहाँ प्रतिभागियों को मौके पर ही जाँच की सुविधा दी गई। जिनमें जोखिम के संकेत पाए गए, उन्हें आगे की जाँच और उपचार के लिए परामर्श दिया गया।
कार्यक्रम की शुरुआत साइटसेवर्स इंडिया के डायरेक्टर (प्रोग्राम ऑपरेशंस) जतिन तिवारी के स्वागत संबोधन से हुई। इसके बाद एबवी थेराप्यूटिक्स इंडिया प्रा. लि. के डायरेक्टर (मेडिकल अफेयर्स) डॉ. राहुल राठौड़ ने अपने विचार साझा किए। उद्घाटन संबोधन एसएमएस अस्पताल के ओफ्थल्मोलॉजी विभाग के प्रमुख डॉ. नागेंद्र सिंह शेखावत ने दिया।
साइटसेवर्स इंडिया के सीईओ आर.एन. मोहंती ने कहा कि क्षेत्रीय स्तर पर ऐसे प्रयासों को और मजबूत करने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि हर बैठक के साथ लोगों को ग्लूकोमा के लक्षण पहचानने और समय पर जाँच कराने के लिए प्रेरित किया जा रहा है। उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि सिर्फ जागरूकता ही नहीं, बल्कि समय पर पहचान और उचित इलाज सुनिश्चित करने के लिए मजबूत स्वास्थ्य तंत्र भी जरूरी है।
डॉ. राहुल राठौड़ ने कहा कि ग्लूकोमा का उपचार केवल पहचान तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके लिए लंबे समय तक नियमित मॉनिटरिंग और उपचार आवश्यक है। उन्होंने बताया कि इस तरह के प्रयास लोगों तक सही जानकारी पहुँचाने और उन्हें निरंतर देखभाल के प्रति जागरूक करने में मदद करते हैं।
कार्यक्रम में अलख नयन मंदिर आई हॉस्पिटल के मेडिकल डायरेक्टर डॉ. लक्ष्मण सिंह झाला सहित कई विशेषज्ञों ने अपने विचार रखे। इसके बाद आयोजित पैनल चर्चा में प्रतिभागियों ने सक्रिय भागीदारी की। पैनल में डॉ. नागेंद्र सिंह शेखावत, डॉ. दर्शना डागा (एएसजी आई हॉस्पिटल, जयपुर), श्री राजन चौधरी और वरिष्ठ पत्रकार पी. श्रीनिवासन शामिल रहे।
चर्चा में ग्लूकोमा जाँच को प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं का हिस्सा बनाने, नेत्र रोग विशेषज्ञों की क्षमता बढ़ाने और मरीजों को बेहतर काउंसलिंग देने पर जोर दिया गया, ताकि वे लंबे समय तक उपचार जारी रख सकें।
इस परामर्श बैठक में कुल 99 प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया, जिनमें से लगभग 45 लोगों की मौके पर ही जाँच की गई। पोर्टेबल उपकरणों की मदद से कई संभावित मरीजों की समय पर पहचान कर उन्हें आगे की जाँच के लिए भेजा गया।
इस साझेदारी के माध्यम से साइटसेवर्स इंडिया और एबवी थेराप्यूटिक्स इंडिया प्राइवेट लिमिटेड लगातार प्रयास कर रहे हैं, ताकि अधिक से अधिक लोगों की समय पर जाँच हो सके, बीमारी का जल्दी पता चल सके और उनकी दृष्टि लंबे समय तक सुरक्षित रखी जा सके।
