गाजियाबाद: एमएमजी जिला अस्पताल बना नशे का अड्डा, परिसर से मिले इंजेक्शन और नशीली दवाइयाँ

  • रिपोर्ट: जितेंद्र कुमार

गाजियाबाद: जिले के प्रमुख सरकारी अस्पताल एमएमजी जिला अस्पताल एक बार फिर विवादों में घिर गया है। इलाज के लिए पहचाने जाने वाले इस अस्पताल को अब लोग “नशे का अड्डा” कहने लगे हैं। कारण है—अस्पताल परिसर से बड़ी मात्रा में इंजेक्शन, नशीली दवाइयाँ और इस्तेमाल की गई नीडल्स का मिलना।

स्थानीय लोग और मरीजों के तीमारदारों का कहना है कि जहां मरीजों को स्वस्थ होना चाहिए, वहीं अब नशेड़ी खुलेआम अस्पताल परिसर का दुरुपयोग कर रहे हैं। हालात ऐसे बन चुके हैं कि इलाज कम और नशाखोरी ज्यादा दिखाई दे रही है।

सबसे बड़ा सवाल यह खड़ा हो रहा है कि अस्पताल परिसर में नशीली दवाइयाँ कैसे पहुँचीं? जानकारों के अनुसार, ऐसी दवाइयाँ बिना डॉक्टर की अनुमति के मिलना लगभग नामुमकिन है। ऐसे में अस्पताल प्रशासन और अंदरूनी व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं।

अस्पताल परिसर से नशीली दवाइयों, इंजेक्शन और नीडल्स का भंडार मिलने के बाद स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप मच गया है। मामले को लेकर कर्मचारियों और अधिकारियों की भूमिका भी संदेह के घेरे में है।

स्थानीय नागरिकों का कहना है कि यदि अस्पतालों में ही नशा होगा तो मरीज कैसे ठीक होंगे? लोग जिला प्रशासन से मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।

फिलहाल, पूरे मामले को लेकर माहौल गरमाया हुआ है और अब सभी की नजरें प्रशासन की अगली कार्रवाई पर टिकी हैं।

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