जियो-शिक्षा का स्मार्ट क्लासरूम: AI से बदलेगा पढ़ाई का तरीका, स्कूल बैग का बोझ होगा कम

नई दिल्ली, 21 फरवरी 2026। भारत में शिक्षा के क्षेत्र में डिजिटल क्रांति की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए Reliance Jio ने ‘जियो-शिक्षा क्लासरूम’ मॉडल पेश किया है, जो पढ़ाई के पारंपरिक तरीकों को पूरी तरह बदल सकता है। इंडिया AI इम्पैक्ट समिट में लगाए गए जियो पवेलियन में इस स्मार्ट क्लासरूम ने खासतौर पर छात्रों और अभिभावकों का ध्यान आकर्षित किया।

भारत में वर्तमान में करीब 25 करोड़ छात्र पारंपरिक शिक्षा प्रणाली के तहत पढ़ाई कर रहे हैं। जियो-शिक्षा का लक्ष्य स्कूलों को भविष्य में “AI-पावर्ड लर्निंग हब” में बदलना है, जहां पढ़ाई अधिक सरल, स्मार्ट और प्रभावी हो सके।

ई-बोर्ड और ई-बुक से जुड़ेगा पूरा क्लासरूम

जियो-शिक्षा क्लासरूम के दो मुख्य आधार जियो ई-बोर्ड और जियो ई-बुक हैं, जो क्लाउड तकनीक के माध्यम से एक-दूसरे से जुड़े रहते हैं। शिक्षक द्वारा ई-बोर्ड पर पढ़ाया गया कंटेंट सीधे छात्रों की ई-बुक में पहुंच जाता है। इससे छात्रों को नोट्स लिखने की जरूरत नहीं पड़ेगी और भारी स्कूल बैग का बोझ भी कम होगा।

ई-बुक में पाठ्यपुस्तकों के साथ-साथ वीडियो, क्विज़ और अतिरिक्त अध्ययन सामग्री भी उपलब्ध रहती है। इससे ब्लैकबोर्ड, किताबें, नोट्स और स्टडी मटीरियल—all-in-one डिजिटल प्लेटफॉर्म पर एक क्लिक में उपलब्ध हो जाएंगे।

AI ट्यूटर से हर छात्र को मिलेगा व्यक्तिगत मार्गदर्शन

जियो-शिक्षा का AI ट्यूटर छात्रों को उनकी गति और समझ के अनुसार सीखने में मदद करेगा। यह ट्यूटर अलग-अलग भाषाओं में संवाद कर सकता है और प्रत्येक छात्र के लिए अलग-अलग लर्निंग पाथ सुझा सकता है। इससे रटने की बजाय समझ-आधारित शिक्षा को बढ़ावा मिलेगा और घर तथा स्कूल के बीच पढ़ाई का निरंतर प्रवाह बना रहेगा।

शिक्षकों और अभिभावकों को भी मिलेगा लाभ

यह सिस्टम शिक्षकों के लिए भी काफी उपयोगी साबित होगा। इसमें ऑटोमेटेड मूल्यांकन, रियल-टाइम प्रदर्शन डेटा और प्रशासनिक कार्यों में कमी जैसे फीचर्स शामिल हैं, जिससे शिक्षक पढ़ाने पर अधिक ध्यान दे सकेंगे। वहीं, प्रिंसिपल और अभिभावक भी छात्रों की प्रगति पर रियल-टाइम नजर रख सकेंगे।

भविष्य की शिक्षा का संकेत

फिलहाल जियो-शिक्षा मॉडल शुरुआती चरण में है और कुछ स्कूलों में ही लागू किया गया है। हालांकि, यह मॉडल भविष्य के स्मार्ट क्लासरूम की स्पष्ट झलक पेश करता है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इसे व्यापक स्तर पर लागू किया गया, तो यह न केवल स्कूल बैग का बोझ कम करेगा, बल्कि शिक्षा को अधिक व्यक्तिगत, सुलभ और प्रभावी बनाने में अहम भूमिका निभाएगा।

 

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