संघर्ष से सफलता तक: 16 साल की उम्र में घर छोड़ा, आज खास मुकाम पर हैं हर्षवर्धन राणे

अभिनेता हर्षवर्धन राणे अपने बेबाक बयानों और अलग सोच के लिए जाने जाते हैं। हाल ही में उन्होंने अपने संघर्ष और जीवन के अनुभवों को साझा करते हुए बताया कि महज़ 16 साल की उम्र में ही उन्होंने बड़े सपने देख लिए थे और उन्हें पूरा करने के लिए घर छोड़ दिया था।

‘सनम तेरी कसम’ और ‘एक दीवाने की दीवानियत’ जैसी सफल फिल्मों से दर्शकों के दिलों में जगह बनाने वाले हर्षवर्धन राणे पूरी तरह आउटसाइडर रहे हैं। उनके पास न कोई गॉडफादर था और न ही फिल्म इंडस्ट्री में कोई सहारा, इसके बावजूद उन्होंने अपनी मेहनत और दृढ़ इच्छाशक्ति के दम पर बॉलीवुड के साथ-साथ साउथ फिल्मों में भी पहचान बनाई।

हर्षवर्धन का मानना है कि सफलता का रास्ता केवल फोकस से होकर गुजरता है। उन्होंने कहा कि उनका पूरा ध्यान हमेशा अपने लक्ष्य, बेहतर काम और दर्शकों की उम्मीदों को पूरा करने पर रहा है। यही वजह है कि चुनौतियां कभी उनके ऊपर हावी नहीं हो पाईं।

एक इंटरव्यू में उन्होंने कहा, “मेरा निश्चय इतना मजबूत रहा है कि कठिनाइयां कभी बड़ी नहीं लगीं। मेरा डिटरमिनेशन मेरे स्ट्रगल से कहीं बड़ा है, इसलिए मुश्किलों का साइज मेरे सामने कभी बड़ा नहीं हुआ।”

पॉडकास्ट और लंबे इंटरव्यू से दूरी बनाने की वजह बताते हुए हर्षवर्धन ने कहा कि वह घंटों अपनी परेशानियों या दूसरों की नकारात्मक बातों पर चर्चा करने में विश्वास नहीं रखते। उनके शब्दों में, “मेरे पास वो मटेरियल ही नहीं है। मेरा फोकस हमेशा लक्ष्य और इच्छाओं पर रहा है, न कि संघर्ष पर।”

उन्होंने साफ कहा कि सपनों पर चुनौतियों को हावी नहीं होने दिया जाए तो इंसान बेहतर काम कर सकता है। यही सोच उन्हें लगातार आगे बढ़ने और दर्शकों के लिए यादगार काम करने की प्रेरणा देती है।

 

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