सिंधु जल संधि स्थगित होने के बाद भारत का बड़ा कदम, सलाल डैम से गाद हटाने के निर्देश से पाकिस्तान में बेचैनी

नई दिल्ली।सिंधु जल संधि (Indus Waters Treaty–IWT) के स्थगित होने के बाद भारत ने जल संसाधनों के बेहतर उपयोग को लेकर कई अहम फैसले लिए हैं, जिससे पाकिस्तान में चिंता बढ़ गई है। इन्हीं फैसलों में से एक है जम्मू-कश्मीर के रियासी जिले में चिनाब नदी पर बने सलाल डैम से गाद (सिल्ट) हटाने का कार्य। केंद्रीय बिजली एवं आवास और शहरी मामलों के मंत्री मनोहर लाल खट्टर ने सलाल डैम में गाद हटाने के काम में तेजी लाने के स्पष्ट निर्देश दिए हैं।

केंद्रीय मंत्री ने इस दौरान रतले हाइड्रो इलेक्ट्रिक प्रोजेक्ट के कंक्रीटिंग कार्य का भी शिलान्यास किया। उल्लेखनीय है कि सिंधु जल संधि लागू रहने के दौरान भारत को सलाल डैम जैसी परियोजनाओं में गाद हटाने जैसे कार्यों के लिए भी पाकिस्तान की सहमति लेनी पड़ती थी, लेकिन संधि के स्थगन के बाद अब भारत स्वतंत्र रूप से ऐसे फैसले ले पा रहा है।

क्या है सलाल डैम परियोजना?

सलाल पावर स्टेशन जम्मू-कश्मीर के रियासी जिले में चिनाब नदी पर स्थित एक प्रमुख जलविद्युत परियोजना है, जिसका संचालन एनएचपीसी (NHPC) द्वारा किया जाता है। इस परियोजना की कुल बिजली उत्पादन क्षमता 690 मेगावाट है। सलाल बांध जम्मू-कश्मीर सहित उत्तरी भारत के कई राज्यों को बिजली आपूर्ति करता है। यह परियोजना सिंधु जल संधि के तहत भारत की पहली बड़ी जलविद्युत परियोजना मानी जाती है। गाद हटाने का उद्देश्य जलाशय की क्षमता बढ़ाना और जल संसाधनों का अधिकतम उपयोग सुनिश्चित करना है।

बिजली मंत्री ने कई परियोजनाओं का किया निरीक्षण

अपने दो दिवसीय जम्मू-कश्मीर दौरे के दौरान केंद्रीय बिजली मंत्री मनोहर लाल खट्टर ने रियासी, रामबन और किश्तवाड़ जिलों में चल रही विभिन्न जलविद्युत परियोजनाओं का निरीक्षण किया। उन्होंने सावलकोट हाइड्रोइलेक्ट्रिक प्रोजेक्ट (1856 मेगावाट) का हवाई निरीक्षण भी किया और कार्यों को समयबद्ध तरीके से पूरा करने के लिए स्थानीय प्रशासन एवं संबंधित विभागों के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक की।

रतले हाइड्रो इलेक्ट्रिक प्रोजेक्ट क्या है?

रतले हाइड्रो इलेक्ट्रिक प्रोजेक्ट जम्मू-कश्मीर के किश्तवाड़ जिले में चिनाब नदी पर बन रहा 850 मेगावाट क्षमता का एक बड़ा जलविद्युत संयंत्र है। यह जम्मू-कश्मीर सरकार और एनएचपीसी का संयुक्त उपक्रम है। वर्ष 2021 में स्वीकृत इस परियोजना की कुल लागत 5,281.94 करोड़ रुपये है और इसके मई 2026 तक चालू होने की संभावना है। यह एक रन-ऑफ-रिवर परियोजना है, जिसमें 133 मीटर ऊंचे कंक्रीट ग्रेविटी बांध और भूमिगत पावरहाउस का निर्माण शामिल है।

गौरतलब है कि पिछले वर्ष पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत सरकार ने सिंधु जल संधि को स्थगित करने की घोषणा की थी। विदेश मंत्रालय ने स्पष्ट किया था कि जब तक पाकिस्तान सीमा पार आतंकवाद को समर्थन देना पूरी तरह और विश्वसनीय रूप से बंद नहीं करता, तब तक यह संधि प्रभावी नहीं होगी। भारत के इन फैसलों को जल संसाधनों के रणनीतिक और राष्ट्रीय हितों से जोड़कर देखा जा रहा है।

 

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