स्काउटिंग के जन्मदाता Robert Baden-Powell का जन्म 22 फरवरी 1857 को इंग्लैंड के स्टैनपोल टैरेस, लैंकास्टर गेट, लंदन में हुआ था। उनके पिता प्रोफेसर हरबर्ट जॉर्ज बेडेन पावेल ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय में ज्यामिति के प्राध्यापक और प्रकृतिवादी थे, जबकि उनकी माता हैनरिट्टा ग्रेस स्मिथ ब्रिटिश एडमिरल डब्ल्यू.टी. स्मिथ की पुत्री थीं। बचपन में उन्हें “स्टी” नाम से पुकारा जाता था।
बचपन से ही वे बहुमुखी प्रतिभा के धनी थे। दोनों हाथों से चित्र बनाना, लेखन, अभिनय, नौकायन, प्रकृति भ्रमण और घुड़सवारी उनके प्रिय शौक थे। कम उम्र में ही उन्होंने आत्मनिर्भर जीवन के कौशल सीख लिए थे—जंगल में बिना बर्तन भोजन बनाना, झोपड़ी तैयार करना, कम्पास से दिशा ज्ञान और मानचित्र बनाना—ये सभी कौशल आगे चलकर स्काउटिंग की नींव बने।
सैनिक जीवन और साहसिक उपलब्धियां
सन् 1876 में वे सेना की परीक्षा में सफल होकर 13वीं हुसार्स रेजिमेंट में उप-लेफ्टिनेंट बने। उनकी तैनाती भारत के लखनऊ में रही। 1883 में मथुरा में आयोजित पिग स्टिकिंग प्रतियोगिता में उन्होंने ‘नायब कादिर कप’ जीता। 1884 में उन्होंने “रिकोनेसैन्स एंड स्काउटिंग” पुस्तक लिखी, जो काफी लोकप्रिय हुई।
दक्षिण अफ्रीका के मैफकिंग (Mafeking) में बोअर युद्ध (1899–1900) के दौरान उन्होंने सीमित संसाधनों में बच्चों को संदेशवाहक एवं सहायक बनाकर ऐतिहासिक विजय प्राप्त की। इसी अनुभव ने बालकों में अनुशासन और सेवा भावना विकसित करने की प्रेरणा दी।
स्काउटिंग की शुरुआत
29 जुलाई से 9 अगस्त 1907 तक उन्होंने ब्राउन्सी द्वीप (Brownsea Island) पर 20 बच्चों के साथ पहला प्रयोगात्मक शिविर लगाया। 1908 में उनकी प्रसिद्ध पुस्तक Scouting for Boys प्रकाशित हुई, जिसने विश्वभर के युवाओं को प्रेरित किया।
4 सितंबर 1909 को क्रिस्टल पैलेस में आयोजित रैली में 11,000 स्काउट्स ने भाग लिया। 1910 में गर्ल गाइड आंदोलन की शुरुआत हुई, जिसकी जिम्मेदारी उनकी बहन एग्नेस बेडेन पावेल को दी गई। 1912 में उनका विवाह ओलावे सेंट क्लेयर सोम्स से हुआ, जो बाद में विश्व गाइड चीफ बनीं।
भारत से विशेष संबंध
भारत में स्काउटिंग 1909 और गाइडिंग 1910 में शुरू हुई। 1921 में लॉर्ड और लेडी बेडेन पावेल भारत आए और दिल्ली, इलाहाबाद, जबलपुर, लखनऊ, रांची और मद्रास का भ्रमण किया। 1920 में उन्हें विश्व स्काउट चीफ घोषित किया गया।
उन्होंने “एड्स टू स्काउट मास्टरशिप” (1919) और “रोवरिंग टू सक्सेस” (1922) जैसी महत्वपूर्ण पुस्तकें लिखीं। 1941 में 83 वर्ष की आयु में उनका निधन हुआ।
स्काउटिंग की विरासत
लॉर्ड बेडेन पावेल ने दुनिया को स्काउटिंग जैसा अनुशासित, वर्दीधारी और सेवा-समर्पित संगठन दिया। आज भी स्काउटिंग खेल-खेल में बच्चों को जीवन कौशल, नेतृत्व, सेवा और राष्ट्रभक्ति का पाठ पढ़ाती है। प्राकृतिक आपदाओं और सामाजिक कार्यों में स्काउट्स-गाइड्स की भूमिका सदैव सराहनीय रही है।
बदायूं जिले के 105 स्काउट-गाइड, स्काउट मास्टर एवं गाइड कैप्टन ने लखनऊ 2025 में तथा 8 स्काउट और 1 यूनिट लीडर ने 2026 में छत्तीसगढ़ में आयोजित राष्ट्रीय रोवर-रेंजर जंबूरी में प्रतिभाग कर जिले का गौरव बढ़ाया है।
संजीव कुमार शर्मा
पूर्व जिला ट्रेनिंग कमिश्नर (स्काउट)
जनपद – बदायूं
मो. 9758494201
khabre junction
