गुस्ताखी माफ हरियाणा-पवन कुमार बंसल
सर पर छत सबको चाहिए — भजन लाल
राम नाम की लूट है।
चर्चा सरकारी प्लॉटों की कोटे से अलॉटमेंट में धांधली की। बड़े-बड़े दिग्गजों के नाम सामने आ रहे हैं। एक प्लॉट में पेट नहीं भरा तो दो-दो ले लिए। पुरानी कहावत है कि यदि हांडी अपना मुख खोल दे तो कुत्ते को तो शर्म करनी चाहिए। उतना माखन खाना चाहिए जितना पेट भरने के लिए जरूरी हो। ज्यादा खाए तो हाजमा खराब होगा। अब फिर रहे हैं ना पुलिस और अदालतों के चक्कर में।
प्लॉट देने के मामले में Bhajan Lal ज्यादा बदनाम हुए, लेकिन लूट सबके राज में हुई। सेना के कोटे के प्लॉट, हुडा के प्लॉट और न जाने कितने कोटे। अपने हुडा साहिब ने तो आर्मी के जनरल को भी प्लॉट दे दिया। भजन लाल ने जजों, अफसरों और पत्रकारों को प्लॉट देकर सिस्टम को तो करप्ट किया, लेकिन आम आदमी का भी ख्याल रखा।
एक बार का किस्सा। चीफ मिनिस्टर रहते हरियाणा सचिवालय, चंडीगढ़ में लिफ्ट से नीचे आ रहे थे। लिफ्ट चलाने वाले कर्मचारी से पूछा— “कहां के हो?” उसने बताया कि करनाल जिले के किसी गांव का। पूछा— “बच्चे कहां पढ़ते हैं?” तो जवाब मिला— “गांव में।”
अरे, करनाल में कोई मकान-वकान बनाया क्या? बच्चे बड़े होकर शहर में पढ़ने आएंगे तो कहां रुकेंगे? अपने पी.ए. से कहकर उससे एप्लीकेशन ली और प्लॉट अलॉट कर दिया।
एक बार ऑल इंडिया के रिपोर्टर राजिंदर सिंह उनका इंटरव्यू करते हुए सरकार के प्लान बारे पूछने लगे। भजन लाल बोले— “भाई, प्लान-व्लान तो चलती रहती है, कोई प्लॉट-व्लॉट की सेवा बताया करो।”
भजन लाल ने कई बार मुझे भी गुरुग्राम या अपनी पसंद की जगह प्लॉट की ऑफर की। उनके डी.आई.जी. इंटेलिजेंस हरीश कुमार अपने दोस्त थे और अब भी हैं। उन्होंने भी कई बार कहा। प्लॉट तो नहीं लिया, हां एक फायदा भजन लाल और Devi Lal से जरूर लिया।
1987 में चंडीगढ़ जनसत्ता नियुक्ति के दौरान तत्कालीन चीफ मिनिस्टर देवी लाल से रहने के लिए पंचकूला में सरकारी मकान लिया। सरकार पत्रकारों को मकान अलॉट करती है। उनके बेटे Om Prakash Chautala आए तो मेहम कांड की कवरेज से नाराज होकर मकान की अलॉटमेंट रद्द कर दी।
फिर रोहतक नियुक्ति के दौरान भजन लाल से कहकर अशोका सिनेमा के सामने सरकारी मकान अलॉट करवाया, वहां शायद अब पार्किंग की जगह है। भारतीय किसान यूनियन के कंडेला आंदोलन की इंडियन एक्सप्रेस में कवरेज से तत्कालीन चीफ मिनिस्टर ओम प्रकाश चौटाला खफा हो गए और उस मकान की अलॉटमेंट भी रद्द कर दी गई।
याद दिला दें कि चौटाला साहिब ऐसा नहीं चाहते थे, लेकिन अफसरों ने चुगली ऐसी कर दी। वैसे यह चौटाला साहिब का बड़प्पन है कि वे मुख्यमंत्री बनने के दस दिन बाद जब रोहतक आए तो रेस्ट हाउस में तत्कालीन डिप्टी कमिश्नर राजेश खुल्लर से कहा कि “पवन के पास चाय पीने जाना है।” अब खुल्लर हैरान— पवन घर है या नहीं, वहां का रूट क्लियर है या नहीं। खैर, चौटाला साहिब आए।
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