राजस्थान में इलेक्ट्रिक ट्रकों से ट्रक चालकों की ज़िंदगी में आ रही स्थिरता, बढ़ रही आय और बेहतर हो रही जीवन गुणवत्ता

जयपुर, फरवरी 2026। राजस्थान में इलेक्ट्रिक वाहनों को अपनाने की दिशा में तेजी से कदम बढ़ाए जा रहे हैं। सरकार के मजबूत समर्थन, नई नीतियों और जागरूकता अभियानों के चलते इलेक्ट्रिक ट्रक अब ट्रक चालकों के लिए स्थिर रोजगार, बेहतर आय और जीवन की बेहतर गुणवत्ता का नया विकल्प बनकर उभर रहे हैं।

साल 2025 में राजस्थान सरकार ने इलेक्ट्रिक वाहन नीति-2022 के तहत 200 करोड़ रुपए का ई-वाहन प्रोत्साहन कोष शुरू किया। इसके अलावा पीएम ई-बस सेवा योजना के तहत राज्य के आठ प्रमुख शहरों में 675 से अधिक इलेक्ट्रिक बसों का संचालन शुरू किया गया। साथ ही नीमराना तहसील में राज्य का पहला इलेक्ट्रिक ई-बस निर्माण संयंत्र भी स्थापित किया गया।

इलेक्ट्रिक वाहनों के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए “नई सोच की सवारी” (एनएसकेएस) अभियान के तहत वर्ष 2024 और 2025 में राज्यभर में कई कार्यक्रम आयोजित किए गए। इन कार्यक्रमों में ट्रक चालकों, मैकेनिकों और फ्लीट संचालकों को इलेक्ट्रिक ट्रकों का प्रत्यक्ष अनुभव कराया गया। चालकों को राजमार्ग और कार्यक्रम स्थल पर इलेक्ट्रिक ट्रक चलाने और देखने का मौका मिला, जिससे उनकी शंकाएं दूर हुईं और नई तकनीक के प्रति विश्वास बढ़ा।

अजय प्रताप सिंह, मुख्य कार्यकारी अधिकारी और सह-संस्थापक, स्विचलैब्स ने बताया कि उनकी कंपनी तय मार्गों पर लंबे अनुबंधों के तहत इलेक्ट्रिक ट्रक संचालित करती है। उन्होंने कहा कि तय मार्ग, नियमित अनुबंध और चार्जिंग सुविधाओं के कारण चालकों को स्थिर काम, बेहतर वेतन और अधिक आर्थिक सुरक्षा मिलती है। इलेक्ट्रिक ट्रक अधिक आरामदायक और चलाने में आसान होते हैं, जिससे चालकों की जीवन गुणवत्ता में सुधार हो रहा है।

जागरूकता कार्यक्रमों में ‘चाय पे चर्चा’ और इंटरैक्टिव सत्रों के माध्यम से चालकों को इलेक्ट्रिक ट्रकों से जुड़े तकनीकी पहलुओं को सरल तरीके से समझाया गया। इन कार्यक्रमों के पहले और बाद में किए गए सर्वेक्षण में प्रतिभागियों की सोच में बड़ा बदलाव देखा गया।

सर्वेक्षण के अनुसार, इलेक्ट्रिक ट्रकों के प्रदर्शन को डीज़ल ट्रकों से बेहतर मानने वाले चालकों की संख्या 61 प्रतिशत से बढ़कर 88 प्रतिशत हो गई। पहाड़ी क्षेत्रों में संचालन को लेकर गलतफहमियां भी काफी कम हुईं और केवल 9 प्रतिशत प्रतिभागियों ने ही इस पर संदेह जताया।

यह कार्यक्रम अजमेर, अबू रोड, किशनगढ़, कोटपूतली और सिरोही सहित राज्य के विभिन्न शहरों में आयोजित किए गए, जिनमें 810 से अधिक चालकों, फ्लीट संचालकों और मैकेनिकों ने भाग लिया।

विशेषज्ञों का मानना है कि इलेक्ट्रिक ट्रक न केवल पर्यावरण के लिए लाभदायक हैं, बल्कि ट्रक चालकों के लिए स्थिर रोजगार, नियमित आय और बेहतर जीवन स्तर सुनिश्चित करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।

 

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