नई दिल्ली।गर्भावस्था का समय किसी भी महिला के जीवन का सबसे अहम और संवेदनशील दौर होता है। इस दौरान मां के साथ-साथ गर्भ में पल रहे शिशु की सेहत का भी पूरा ध्यान रखना आवश्यक होता है। ऐसे में शरीर में खून यानी हीमोग्लोबिन की पर्याप्त मात्रा बेहद जरूरी हो जाती है, क्योंकि यही मां से बच्चे तक ऑक्सीजन और पोषण पहुंचाने का काम करता है। यदि गर्भावस्था के दौरान हीमोग्लोबिन की कमी हो जाए, तो इसका असर मां की सेहत के साथ-साथ बच्चे के विकास पर भी पड़ सकता है।
शुरुआती चरण में हीमोग्लोबिन की कमी थकान, सांस फूलना और चक्कर आने जैसे लक्षणों के रूप में दिखाई देती है, लेकिन समय रहते ध्यान न दिया जाए तो यह कमजोरी, संक्रमण का खतरा और प्रसव के दौरान जटिलताओं का कारण बन सकती है। इसलिए गर्भावस्था में इस समस्या को नजरअंदाज करना ठीक नहीं है।
आयरन युक्त आहार को बनाएं डाइट का हिस्सा
गर्भावस्था में रोजमर्रा के भोजन में आयरन से भरपूर चीजों को शामिल करना बेहद जरूरी है। हरी पत्तेदार सब्जियां जैसे पालक, मेथी और सरसों आयरन और फोलेट का अच्छा स्रोत होती हैं, जो खून बनने की प्रक्रिया को मजबूत करती हैं। चुकंदर भी काफी लाभकारी माना जाता है, क्योंकि यह लाल रक्त कोशिकाओं के निर्माण में मदद करता है। इसके अलावा अनार, सेब और आंवला जैसे फल भी कमजोरी को दूर करने में सहायक होते हैं।
सूखे मेवे और पारंपरिक खाद्य पदार्थ
खजूर, किशमिश और अंजीर जैसे सूखे मेवे आयरन और प्राकृतिक शुगर से भरपूर होते हैं। इन्हें रात में भिगोकर सुबह सेवन करने से शरीर को बेहतर पोषण मिलता है। काले तिल और गुड़ का सेवन भी गर्भवती महिलाओं के लिए उपयोगी माना जाता है, क्योंकि यह आयरन की कमी को पूरा करने के साथ-साथ थकान और कमजोरी को भी कम करता है।
विटामिन C का रखें ध्यान
आयरन के सही अवशोषण के लिए विटामिन C बेहद जरूरी है। इसलिए भोजन के साथ नींबू, संतरा, मौसमी या आंवला जैसी चीजों को शामिल करना चाहिए। वहीं चाय और कॉफी से दूरी बनाए रखना जरूरी है, क्योंकि ये आयरन के अवशोषण में बाधा डालती हैं। अगर चाय पीनी हो, तो भोजन और आयरन की दवा के बीच पर्याप्त अंतर रखें।
दवाइयों और जीवनशैली का महत्व
डॉक्टर द्वारा दी गई आयरन और फोलिक एसिड की दवाओं को नियमित रूप से लेना बहुत जरूरी है। कई बार पेट की परेशानी के कारण महिलाएं दवा छोड़ देती हैं, लेकिन बिना डॉक्टर की सलाह दवा बंद करना नुकसानदायक हो सकता है। इसके अलावा पर्याप्त नींद, मानसिक शांति, हल्की सैर और प्राणायाम भी शरीर में ऑक्सीजन के स्तर को बेहतर बनाते हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि गर्भावस्था में कोई भी आहार या घरेलू उपाय अपनाने से पहले डॉक्टर की सलाह जरूर लेनी चाहिए, ताकि मां और बच्चे दोनों सुरक्षित और स्वस्थ रहें।
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Disclaimer: यह लेख केवल सामान्य जानकारी के लिए है. इस तरह की किसी भी जानकारी पर अमल करने से पहले डॉक्टर या किसी विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें
