नई दिल्ली।सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय ने प्रदूषण फैलाने वाले वाहनों पर सख्ती दिखाते हुए नियमों को और कड़ा कर दिया है। अब सड़क पर वाहन चलाते समय केवल ड्राइविंग लाइसेंस और बीमा दस्तावेज होना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि प्रदूषण नियंत्रण प्रमाणपत्र (PUC) रखना भी अनिवार्य कर दिया गया है। इसकी अनदेखी करना वाहन चालकों को भारी पड़ सकता है।
मोटर वाहन अधिनियम के तहत बिना वैध PUC सर्टिफिकेट वाहन चलाने पर ₹10,000 तक का जुर्माना और 6 महीने तक की जेल का प्रावधान है। इतना ही नहीं, दोषी पाए जाने पर परिवहन विभाग द्वारा ड्राइविंग लाइसेंस 3 महीने के लिए निलंबित भी किया जा सकता है।
₹50 का सर्टिफिकेट, ₹10,000 के जुर्माने से बचाव
अक्सर नजरअंदाज किया जाने वाला PUC प्रमाणपत्र मात्र ₹50 से ₹100 की लागत में बन जाता है, लेकिन यह छोटा सा दस्तावेज भारी जुर्माने और कानूनी कार्रवाई से बचाने में अहम भूमिका निभाता है।
PUC न होने पर क्या है सजा का प्रावधान
मोटर वाहन अधिनियम, 1993 की धारा 190(2) के अनुसार बिना PUC वाहन चलाना गंभीर अपराध है। पहली बार पकड़े जाने पर ही ₹10,000 तक का जुर्माना लगाया जा सकता है। साथ ही जेल की सजा और लाइसेंस निलंबन की कार्रवाई भी हो सकती है।
वाहन चलाते समय ये 4 दस्तावेज अनिवार्य
सड़क पर सुरक्षित और कानूनी रूप से वाहन चलाने के लिए निम्न चार दस्तावेज होना जरूरी है—
ड्राइविंग लाइसेंस
रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट (RC)
बीमा दस्तावेज
प्रदूषण नियंत्रण प्रमाणपत्र (PUC)
इन सभी दस्तावेजों को DigiLocker या mParivahan ऐप में डिजिटल रूप में भी रखा जा सकता है, जिन्हें कानूनन मान्यता प्राप्त है।
कैसे बनवाएं PUC प्रमाणपत्र
PUC बनवाने की प्रक्रिया बेहद आसान है। देशभर के अधिकतर पेट्रोल पंपों पर अधिकृत प्रदूषण जांच केंद्र उपलब्ध हैं। जांच के दौरान वाहन के साइलेंसर से निकलने वाले धुएं की मात्रा और हानिकारक गैसों की जांच की जाती है। यह प्रक्रिया मात्र 5–10 मिनट में पूरी हो जाती है और प्रमाणपत्र तुरंत जारी कर दिया जाता है।
कितनी होती है वैधता
नए वाहनों के लिए PUC आमतौर पर 1 साल तक वैध होता है। इसके बाद वाहन के प्रकार और मानकों के अनुसार हर 6 महीने या 1 साल में इसे नवीनीकरण कराना अनिवार्य होता है।
पर्यावरण और स्वास्थ्य की जिम्मेदारी
PUC केवल चालान से बचने का जरिया नहीं, बल्कि पर्यावरण संरक्षण की दिशा में नागरिक जिम्मेदारी भी है। अधिक प्रदूषण फैलाने वाले वाहन न सिर्फ हवा को जहरीला बनाते हैं, बल्कि यह वाहन के इंजन की खराब स्थिति का संकेत भी होते हैं। समय पर प्रदूषण जांच कराने से वाहन की माइलेज बेहतर रहती है और इंजन की उम्र भी बढ़ती है।
सरकार की इस सख्ती का उद्देश्य साफ है—प्रदूषण पर नियंत्रण और आम नागरिकों को स्वच्छ हवा उपलब्ध कराना। ऐसे में वाहन चालकों को चाहिए कि समय रहते PUC सर्टिफिकेट बनवाकर नियमों का पालन करें।
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