नई दिल्ली। राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में एक बार फिर वायु प्रदूषण का स्तर बढ़ने लगा है। केंद्रीय वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) ने दिल्ली-एनसीआर में ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान (GRAP) के पहले चरण (स्टेज-1) को तत्काल प्रभाव से लागू कर दिया है। यह फैसला तब लिया गया जब 14 अक्टूबर 2025 को दिल्ली का वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) 211 दर्ज किया गया, जो “खराब” श्रेणी में आता है।
भारतीय मौसम विभाग (IMD) और भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IITM) के पूर्वानुमान के अनुसार, आने वाले दिनों में भी प्रदूषण का स्तर “खराब” श्रेणी में बना रह सकता है, इसलिए यह निर्णय आवश्यक माना गया।
दिल्ली-NCR में GRAP-1 लागू, बढ़ते प्रदूषण पर CAQM का बड़ा फैसला
दिल्ली-एनसीआर में GRAP-1 लागू होते ही वायु प्रदूषण नियंत्रण के कई नियम लागू हो गए हैं। इस चरण में 10 से 15 साल पुरानी पेट्रोल और डीजल गाड़ियों को चलाने पर रोक नहीं, बल्कि सलाह दी गई है कि उन्हें सड़कों पर न लाया जाए। हालांकि, सभी वाहनों के लिए मान्य प्रदूषण नियंत्रण प्रमाणपत्र (PUC) अनिवार्य कर दिया गया है।
साथ ही, सड़कों और निर्माण स्थलों पर धूल नियंत्रण के लिए एंटी-स्मॉग गन का उपयोग किया जाएगा।
500 वर्ग मीटर से बड़े निर्माण प्रोजेक्ट्स में डस्ट मैनेजमेंट प्लान का पालन जरूरी होगा।
GRAP-1 के तहत लागू प्रमुख पाबंदियां
कोयला और लकड़ी से चलने वाले रेस्टोरेंट, होटल व ढाबों पर प्रतिबंध रहेगा। अब केवल बिजली या गैस जैसे स्वच्छ ईंधन का उपयोग किया जा सकेगा।
कचरा, पत्ते और अन्य अपशिष्ट सामग्री को खुले में जलाने पर पूर्ण प्रतिबंध रहेगा।
डीजल जनरेटरों का उपयोग केवल आपातकालीन स्थितियों में ही किया जा सकेगा।
प्रदूषण फैलाने वाले वाहनों पर जुर्माना या जब्ती की कार्रवाई की जा सकती है।
चौराहों पर ट्रैफिक पुलिस की तैनाती बढ़ाई गई है, ताकि चालकों को लाल बत्ती पर इंजन बंद रखने के लिए प्रेरित किया जा सके।
AQI श्रेणियों की जानकारी
केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) के अनुसार—
0 से 50: अच्छा (Good)
51 से 100: संतोषजनक (Satisfactory)
101 से 200: मध्यम (Moderate)
201 से 300: खराब (Poor)
301 से 400: बहुत खराब (Very Poor)
401 से 500: गंभीर (Severe)
वर्तमान में दिल्ली का एक्यूआई 211 है, जो खराब श्रेणी में आता है और स्वास्थ्य के लिए हानिकारक माना जाता है।
राजधानी में छाई धुंध, विजिबिलिटी पर असर
दिल्ली के कई हिस्सों में प्रदूषण का असर साफ दिख रहा है। इंडिया गेट, राजपथ, आईटीओ और आनंद विहार जैसे इलाकों में धुंध की परत छाई हुई है।
विजिबिलिटी कम होने से यातायात भी प्रभावित हो रहा है।
दिल्ली के ज्यादातर क्षेत्रों में AQI 200 से 300 के बीच बना हुआ है।
मौसम विभाग के अनुसार, 14 अक्टूबर से 16 अक्टूबर तक वायु गुणवत्ता “खराब” श्रेणी में बनी रह सकती है। इसके बाद “बहुत खराब” स्तर तक पहुंचने की संभावना भी जताई गई है।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों की चिंता
विशेषज्ञों का कहना है कि खराब वायु गुणवत्ता से अस्थमा, खांसी, आंखों में जलन और सांस की तकलीफ जैसी बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। बुजुर्गों, बच्चों और हृदय रोगियों को विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी गई है।
