Death Anniversary: भारत की विख्यात गणितज्ञ एवं ज्योतिषी शकुंतला देवी ने कंप्यूटरों की गणना को भी दी थी मात..
‘मानव कम्प्यूटर’ के नाम से प्रसिद्ध इस महान शख्सियत ने नही ली कोई औपचारिक शिक्षा
नई दिल्ली। ‘मानव कम्प्यूटर’ के नाम से विख्यात गणितज्ञ एवं ज्योतिषी शकुंतला देवी की आज 11वीं पुण्यतिथि है। ‘मानव कम्प्यूटर’ के नाम से प्रसिद्ध शकुंतला देवी अपने समय के सबसे तेज माने जाने वाले कंप्यूटरों की गणना को मात दे दी थी। शकुंतला देवी भारत की एक महान शख्सियत और बहुत ही जिंदादिल महिला थीं। बचपन से ही अद्भुत प्रतिभा की धनी शकुंतला देवी सामाजिक कार्यकर्ता और लेखिका भी थीं।
जीवन परिचय
शकुंतला देवी का जन्म 4 नवम्बर, 1929 को बंगलौर (कर्नाटक) शहर में एक रूढ़िवादी कन्नड़ ब्राह्मण परिवार में हुआ था। शकुंतला देवी एक गरीब परिवार में जन्मीं थीं, जिस कारण वह औपचारिक शिक्षा भी नहीं ग्रहण कर पाई थीं।
3 वर्ष की आयु में ताश के खेल में पिता को हराया
3 वर्ष की आयु में ही शकुंतला देवी ताश के खेल में कई बार अपने पिता को हराया तब इनके पिता ने शकुंतला देवी पर सार्वजनिक कार्यक्रम आयोजित करना शुरु कर दिया और इनकी क्षमता को भी पहले स्थानीय स्तर पर प्रदर्शित किया। और जब वह 15 वर्षों की हुईं तो राष्ट्रीय मीडिया सहित अंतर्राष्ट्रीय मीडिया में इन्हें पहचान मिलने लगी।
व्यक्तिगत जीवन
शकुन्तला देवी का विवाह वर्ष 1960 में कोलकात्ता के एक बंगाली आई.ए.एस. अधिकारी परितोष बनर्जी के साथ हुआ। लेकिन 1979 में शकुन्तला ने अपने पति से तलाक ले लिया। वर्ष 1980 में ये अपनी बेटी के साथ पुन: बेंगलोर लौट आईं।
मानव कंप्यूटर के रूप में मिली प्रसिद्धि
27 सितम्बर, 1973 को विश्व भर में प्रसारित होने वाले रेडियो चैनेल ‘बीबीसी’ द्वारा आयोजित एक प्रोग्राम ‘नेशनवाइड’ में उस समय के चर्चित बॉब वेल्लिंग्स द्वारा गणित से सम्बंधित पूछे गए सभी जटिल प्रश्नों का सही उत्तर देने के कारण वे अचंभित हो गए थे। इम्पीरियल कॉलेज, लन्दन, में इन्होंने 18 जून, 1980 को गणित के एक कठिन प्रश्न का सही उत्तर कुछ सेकंड में देकर वहां उपस्थित दर्शकों को आश्चर्य चकित कर दिया था।
16 वर्ष की अवस्थ में इनको बहुत ही प्रसिद्ध तब मिली, जब इन्होंने दो 13 अंकों की संख्याओं का गुणनफल 28 सेकंड में निकाल कर उस समय के संसार के सबसे तेज कंप्यूटर को 10 सेकंड के अंतर से हराया दिया।
डलास की एक युनिवर्सिटी में इनका मुकाबला आधुनिक तकनीकों से लैस एक कंप्यूटर ‘यूनीवैक’ से हुआ। इस मुकाबले में शकुंतला को मानसिक गणना से 201 अंकों की एक संख्या का 23वां मूल निकालना था। यह सवाल हल करने में उन्हें 50 सेकंड लगे, जबकि ‘यूनीवैक’ नामक कंप्यूटर ने इस काम के लिए 62 सेकंड का समय लिया था। इस घटना के तुरंत बाद ही दुनिया भर में शकुंतला देवी का नाम ‘भारतीय मानव कंप्यूटर’ के रूप में प्रख्यात हो गया।
उपलब्धियां
शकुंतला देवी को फिलिपिंस विश्वविद्यालय ने वर्ष 1969 में ‘वर्ष की विशेष महिला’ की उपाधि और गोल्ड मेडल प्रदान किया गया था। उनका नाम 1982 में ‘गिनीज़ बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स’ में भी शामिल किया गया। मृत्यु से एक माह पूर्व वर्ष 2013 में इन्हें मुम्बई में ‘लाइफटाइम अचीवमेंट अवार्ड’ से भी सम्मानित किया गया।
निधन
शकुंतला देवी का निधन हृदय गति रुक जाने के कारण 21 अप्रैल, 2013 को बंगलौर (कर्नाटक) में 83 वर्ष की अवस्था में हो गया था।
