दाली-रुइली रेलवे: चीन बना रहा दुनिया की सबसे मुश्किल रेल लाइन, 330 किमी में 34 पुल और 21 सुरंगें

बीजिंग: चीन दक्षिण-पश्चिमी क्षेत्र में 330 किलोमीटर लंबी दाली-रुइली रेलवे लाइन का निर्माण कर रहा है, जिसे दुनिया की सबसे कठिन रेल परियोजनाओं में से एक माना जा रहा है। यह रेल लाइन युन्नान प्रांत के दाली शहर को म्यांमार सीमा से लगे रुइली शहर से जोड़ेगी और क्षेत्र में परिवहन व्यवस्था को पूरी तरह बदलने की क्षमता रखती है।

रिपोर्ट के अनुसार, यह रेलवे लाइन पहाड़ी, भूकंपीय और जटिल भूगर्भीय क्षेत्रों से होकर गुजरती है, जिसके कारण इसका निर्माण इंजीनियरिंग के लिए बड़ी चुनौती बना हुआ है।

दो चरणों में हो रहा निर्माण

यह परियोजना दो हिस्सों में बनाई जा रही है—

पहला चरण: दाली से बाओशान

दूसरा चरण: बाओशान से रुइली

रुइली शहर म्यांमार के साथ एक प्रमुख सीमा व्यापार केंद्र है, जिससे इस रेल लाइन के जरिए चीन को दक्षिण और दक्षिण-पूर्व एशिया से बेहतर संपर्क मिलेगा।

क्यों है दुनिया की सबसे मुश्किल रेलवे लाइन

इस परियोजना को कठिन बनाने वाले प्रमुख कारण इस प्रकार हैं—

कुल 34 बड़े पुल और 21 लंबी सुरंगों का निर्माण

हेंगडुआन पहाड़ों जैसे कठिन पर्वतीय क्षेत्रों को काटकर लाइन बिछाना

चार बड़ी नदियों को पार करना

कई भूगर्भीय फॉल्ट लाइनों से होकर गुजरना

भूकंप और भूस्खलन संभावित क्षेत्रों में निर्माण

विशेषज्ञों के अनुसार, सामान्य भूभाग में इतनी लंबाई की रेलवे लाइन 3 साल में बन सकती है, लेकिन कठिन परिस्थितियों के कारण इस परियोजना में दशकों का समय लग रहा है।

12 साल में बनी एक सुरंग

परियोजना की सबसे चुनौतीपूर्ण दाझुशान सुरंग 14.4 किलोमीटर लंबी है, जो छह भूगर्भीय फॉल्ट लाइनों को पार करती है। इसे पूरा करने में करीब 12 साल का समय लगा। निर्माण के दौरान सुरंगों में भारी मात्रा में भूजल का बहाव हुआ, जिससे मजदूरों को लंबे समय तक पानी में काम करना पड़ा।

2008 में शुरू हुआ काम, 2030 तक पूरा होने की उम्मीद

इस रेलवे परियोजना का पहला चरण 2008 में शुरू हुआ और 2022 में पूरा हो गया। दूसरा और अंतिम चरण 2030 तक पूरा होने की संभावना है।

क्षेत्रीय विकास और व्यापार को मिलेगा बढ़ावा

इस रेल लाइन के पूरा होने के बाद युन्नान के पहाड़ी क्षेत्रों में परिवहन आसान होगा और चीन को दक्षिण व दक्षिण-पूर्व एशिया के देशों से जोड़ने में मदद मिलेगी। विशेषज्ञों का मानना है कि यह परियोजना वैश्विक रेलवे इंजीनियरिंग के क्षेत्र में एक ऐतिहासिक उपलब्धि साबित हो सकती है।

 

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