भ्रष्टाचार जांच बनी फुटबॉल, एसीबी गुरुग्राम और सहकारिता विभाग के बीच फंसी फाइल

Gustakhi Maaf Haryana-Pawan Kumar Bansal

cसहकारिता विभाग के बीच शटल कॉक/फुटबॉल की तरह घूमती नजर आ रही है। सेक्टर-9, गुरुग्राम स्थित अभिनव को-ऑपरेटिव सोसाइटी में धन के गबन, डायवर्जन और हेराफेरी से जुड़ी जांच रिपोर्ट पिछले कई महीनों से किसी ठोस कार्रवाई के बिना लंबित है।

शिकायतकर्ता एवं सोसाइटी के सदस्य नितिन भाटिया के अनुसार, उन्होंने इस मामले की शिकायत मुख्यमंत्री विंडो पर दर्ज कराई थी। शिकायत की जांच सहायक रजिस्ट्रार सहकारी समितियां (एआरसीएस), गुरुग्राम द्वारा की गई, जिसमें सार्वजनिक सेवक और प्रबंधन समिति द्वारा फंड के डायवर्जन, गबन, दुरुपयोग और हेराफेरी की पुष्टि हुई। एआरसीएस गुरुग्राम ने 25 मई को अपनी जांच रिपोर्ट मुख्यमंत्री विंडो पर अपलोड की थी।

इसके बाद मुख्यमंत्री विंडो से मामले को एसीएस–कोऑपरेशन विभाग के माध्यम से एंटी करप्शन ब्यूरो, गुरुग्राम को भेजने के निर्देश दिए गए। आदेश के अनुपालन में मामला औपचारिक रूप से एसीबी गुरुग्राम को सौंपा गया।

हालांकि, हैरानी की बात यह है कि एसपी, एसीबी गुरुग्राम ने यह कहते हुए फाइल वापस एआर गुरुग्राम/एसीएस–कोऑपरेशन को लौटा दी कि एआरसीएस कार्यालय सीधे एंटी करप्शन ब्यूरो को शिकायत नहीं भेज सकता। यदि एसीबी से जांच करानी है, तो यह प्रक्रिया अतिरिक्त मुख्य सचिव, सहकारिता विभाग (श्री विजेंद्र कुमार, आईएएस) के माध्यम से मुख्य सचिव–विजिलेंस तक पहुंचाई जानी चाहिए।

एसपी एसीबी गुरुग्राम ने इस संबंध में एसीएस–कोऑपरेशन को भी सूचित कर दिया है। परिणामस्वरूप अब यह मामला चौथी बार एसीएस–कोऑपरेशन विभाग के कार्यालय में लौट आया है।

शिकायतकर्ता का आरोप है कि जांच रिपोर्ट में भ्रष्टाचार स्पष्ट रूप से सिद्ध होने के बावजूद किसी भी एजेंसी या अधिकारी द्वारा सख्त कार्रवाई नहीं की जा रही है। इस पूरे घटनाक्रम ने सरकारी तंत्र की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं और भ्रष्टाचार के मामलों में जवाबदेही को लेकर बहस तेज कर दी है।

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