मिर्जापुर मेडिकल कॉलेज में भ्रष्टाचार का खुलासा: नेत्र सर्जरी टेबल की खरीद में 5.5 लाख रुपये का दुरुपयोग

  • रिपोर्ट- मंजय वर्मा

मिर्जापुर:  स्वायत्तशासी राजकीय मेडिकल कॉलेज मिर्जापुर में सरकारी धन के दुरुपयोग का एक और चौंकाने वाला मामला सामने आया है। भैरो सिंह नेत्र चिकित्सालय के लिए खरीदी गई नेत्र सर्जरी टेबल और स्टूल में ₹5.5 लाख की अनियमितता उजागर हुई है। लखनऊ स्थित स्मिथ मेडी केयर नामक कंपनी से की गई इस खरीद में कई आवश्यक विवरण बिल पर मौजूद नहीं हैं, जिससे खरीद प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं।

संदिग्ध बिल और कीमतों में भारी अंतर
इस इनवॉइस (संख्या: SMC/25-26/30, दिनांक: 18 जून 2025) के अनुसार, उपकरणों की लागत ₹4,66,101.69 दर्शाई गई है, जिस पर 9% CGST और 9% SGST जोड़कर कुल राशि ₹5,50,000 की गई है। यह खरीद GEM पोर्टल से (ऑर्डर संख्या: GEMC-511687765752825) की गई थी। लेकिन विशेषज्ञों के अनुसार, इसी गुणवत्ता की टेबल देश की प्रतिष्ठित कंपनी अप्पासेमी से लगभग पांच की संख्या में खरीदी जा सकती है। इतना ही नहीं, बिल पर कंपनी का नाम, संपर्क विवरण और वैध दस्तावेजों की अनुपस्थिति इस खरीद को संदिग्ध बनाती है।

प्रशासन की भूमिका पर सवाल
बिल पर मेडिकल कॉलेज की ओर से मुख्य औषधिक के रूप में श्रीमती मां विंध्यवासिनी के हस्ताक्षर मौजूद हैं, जो प्रशासनिक जवाबदेही की ओर भी संकेत करते हैं। सूत्रों का दावा है कि इस प्रकार की कई और खरीदें पहले भी बिना पारदर्शिता के की गई हैं। अस्पतालों में दवाओं और जरूरी उपकरणों की भारी कमी है, जबकि फर्जी बिलों पर भारी-भरकम धनराशि खर्च की जा रही है।

जनता का आक्रोश और जांच की मांग
स्थानीय नागरिकों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने इस पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच की मांग उठाई है। उनका कहना है कि यदि मेडिकल कॉलेज की खरीद-फरोख्त का पूरा ऑडिट कराया जाए, तो कई और घोटाले सामने आ सकते हैं। लोगों का आरोप है कि यहां “अंधेर नगरी चौपट राजा” जैसी स्थिति बनी हुई है, जहां न तो प्रशासन जवाबदेह है और न ही कोई नियंत्रण व्यवस्था।

यह मामला सिर्फ एक विभाग की गड़बड़ी नहीं, बल्कि पूरे संस्थान में फैले भ्रष्टाचार की झलक है। सरकार और स्वास्थ्य विभाग को चाहिए कि इस पूरे प्रकरण की उच्चस्तरीय जांच कर दोषियों को कड़ी सजा दिलाए और मेडिकल कॉलेज में पारदर्शिता तथा जवाबदेही सुनिश्चित करे, ताकि मरीजों की उम्मीद और जनता का विश्वास दोबारा स्थापित हो सके।

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