चीन में दुनिया के पहले हाइब्रिड न्यूक्लियर पावर प्लांट का निर्माण शुरू, 2032 में शुरू होने की उम्मीद
Hybrid Nuclear Power Plant:चीन ने न्यूक्लियर ऊर्जा के क्षेत्र में एक बड़ी उपलब्धि हासिल करते हुए दुनिया के पहले हाइब्रिड न्यूक्लियर पावर प्लांट के निर्माण की शुरुआत कर दी है। यह अत्याधुनिक जुवेई न्यूक्लियर पावर प्लांट परियोजना का पहला चरण वर्ष 2032 तक चालू होने की उम्मीद है। इस परियोजना को पारंपरिक परमाणु बिजली संयंत्रों से अलग और कहीं अधिक उन्नत माना जा रहा है।
कहां बन रहा है नया पावर प्लांट
जुवेई न्यूक्लियर पावर प्लांट पूर्वी चीन के जियांग्सू प्रांत के लियानयुंगांग शहर में बनाया जा रहा है। इस परियोजना के निर्माण में लगभग सात वर्ष लगने का अनुमान है। शुक्रवार को न्यूक्लियर यूनिट-1 के लिए कंक्रीट डालने के साथ ही आधिकारिक तौर पर निर्माण कार्य की शुरुआत कर दी गई।
कैसे अलग है यह हाइब्रिड न्यूक्लियर पावर प्लांट
इस परियोजना की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसमें दो अलग-अलग न्यूक्लियर तकनीकों का संयोजन किया जा रहा है। जुवेई प्लांट में हुआलोंग वन प्रेशराइज्ड वॉटर रिएक्टर के साथ एक हाई-टेम्परेचर गैस-कूल्ड रिएक्टर को जोड़ा जाएगा। इस तरह की तकनीक का एक ही परिसर में इस्तेमाल पहली बार किया जा रहा है।
बिजली के साथ भाप भी करेगा उत्पादन
यह हाइब्रिड न्यूक्लियर पावर प्लांट केवल बिजली उत्पादन तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि औद्योगिक उपयोग के लिए भाप (स्टीम) की आपूर्ति भी करेगा। विशेषज्ञों के अनुसार, इस तरह की बहुउद्देश्यीय न्यूक्लियर फैसिलिटी अब तक दुनिया में कहीं भी विकसित नहीं की गई है।
दो चरणों में होगा निर्माण
जुवेई न्यूक्लियर पावर प्लांट परियोजना को दो चरणों में विकसित किया जाएगा। पहले चरण में एक हुआलोंग वन रिएक्टर यूनिट और एक हाई-टेम्परेचर गैस-कूल्ड रिएक्टर यूनिट का निर्माण किया जाएगा।
कौन कर रहा है परियोजना का निर्माण
हुआलोंग वन रिएक्टर चीन की पूरी तरह स्वदेशी तीसरी पीढ़ी की परमाणु तकनीक पर आधारित है। इस तकनीक को चाइना जनरल न्यूक्लियर पावर ग्रुप और चाइना नेशनल न्यूक्लियर कॉर्पोरेशन द्वारा विकसित किया गया है।
चीन को क्या होगा फायदा
प्लांट के चालू होने के बाद चीन को ऊर्जा के क्षेत्र में बड़ा लाभ मिलने की उम्मीद है। अनुमान है कि इससे फॉसिल फ्यूल पर निर्भरता में भारी कमी आएगी। हर साल लगभग 7.26 मिलियन टन कोयले की खपत घटेगी और करीब 19.6 मिलियन टन कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन कम किया जा सकेगा। इससे चीन के पर्यावरणीय लक्ष्यों को भी मजबूती मिलेगी।
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