रोहतक में सहकारी शुगर मिल भाली से फैल रहे वायु प्रदूषण और फ्लाई ऐश पर बढ़ी चिंता, मानवाधिकार आयोग से हस्तक्षेप की मांग

गुस्ताख़ी माफ़ हरियाणा – पवन कुमार बंसल

रोहतक जिले में स्थित सहकारी शुगर मिल भाली से निकल रहे वायु प्रदूषण और फ्लाई ऐश को लेकर गंभीर चिंताएं सामने आई हैं। यह मिल Indian Institute of Management Rohtak, पुलिस ट्रेनिंग सेंटर सुनारिया और आसपास के कई गांवों के नजदीक स्थित है। स्थानीय निवासियों ने इस मामले में Haryana Human Rights Commission से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है, क्योंकि यह समस्या लगातार जनस्वास्थ्य और पर्यावरण को प्रभावित कर रही है।

रिपोर्टों के अनुसार ईंधन के दहन से बनने वाला महीन कणीय अवशेष, जिसे फ्लाई ऐश कहा जाता है, आसपास के रिहायशी और कृषि क्षेत्रों में फैल रहा है। हवा में इन सूक्ष्म कणों के फैलाव से छात्रों, प्रशिक्षुओं, स्थानीय ग्रामीणों और पशुधन के स्वास्थ्य पर गंभीर खतरा उत्पन्न हो गया है।

चिकित्सकीय विशेषज्ञों के अनुसार फ्लाई ऐश और सूक्ष्म कणों के संपर्क में आने से श्वसन संबंधी बीमारियां जैसे अस्थमा, ब्रोंकाइटिस, लगातार खांसी, सांस लेने में कठिनाई और फेफड़ों की क्षमता में कमी हो सकती है। प्रभावित क्षेत्रों के लोगों ने आंखों में जलन, त्वचा एलर्जी और गले के संक्रमण जैसी समस्याओं की भी शिकायत की है। लंबे समय तक इस तरह के प्रदूषण के संपर्क में रहने से हृदय संबंधी जटिलताओं और अन्य गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का खतरा भी बढ़ सकता है।

इस प्रदूषण का प्रभाव केवल मनुष्यों तक ही सीमित नहीं है। आसपास के पशु और पालतू जानवर भी श्वसन संबंधी समस्याओं से प्रभावित हो सकते हैं तथा दूषित चारे के सेवन से उनकी सेहत पर भी विपरीत असर पड़ सकता है। इसके अलावा फसलों और मिट्टी पर फ्लाई ऐश के जमाव से कृषि उत्पादन, मिट्टी की उर्वरता और क्षेत्र के पर्यावरणीय संतुलन पर भी नकारात्मक प्रभाव पड़ने की आशंका है।

बताया जाता है कि इस मुद्दे को लगभग तीन वर्ष पहले “गुस्ताख़ी माफ़ हरियाणा” के माध्यम से उठाया गया था। उस समय रोहतक के तत्कालीन उपायुक्त Yashpal, जो वर्तमान में मुख्यमंत्री कार्यालय में महत्वपूर्ण पद पर कार्यरत हैं, ने प्रदूषण और फ्लाई ऐश प्रबंधन की समस्या को दूर करने के लिए आवश्यक कदम उठाने का आश्वासन दिया था। हालांकि स्थानीय लोगों का कहना है कि इन आश्वासनों के बावजूद अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है और स्थिति पहले से अधिक गंभीर हो गई है।

स्थानीय निवासियों ने प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और हरियाणा सरकार से इस मामले में तत्काल और सख्त कदम उठाने की मांग की है। उन्होंने प्रभावी धूल नियंत्रण प्रणाली स्थापित करने, वायु गुणवत्ता की निरंतर निगरानी, फ्लाई ऐश के वैज्ञानिक निपटान और पर्यावरणीय सुरक्षा मानकों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करने की आवश्यकता बताई है। साथ ही संबंधित विभागों द्वारा नियमित निरीक्षण और पारदर्शी रिपोर्टिंग की भी मांग की गई है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि छात्रों, प्रशिक्षुओं, ग्रामीणों, कृषि श्रमिकों और पशुधन के लिए सुरक्षित और स्वस्थ वातावरण सुनिश्चित करने के लिए इस मामले पर तुरंत गंभीर ध्यान देने की आवश्यकता है।

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