एटा। 26वीं अखिल भारतीय पुलिस बैंड प्रतियोगिता में सीआईएसएफ महिला बैंड द्वारा स्वर्ण पदक अर्जित किया जाना केवल एक प्रतियोगिता में मिली जीत नहीं, बल्कि भारतीय सुरक्षा बलों के इतिहास में महिलाओं की बढ़ती सशक्त और निर्णायक भूमिका का सशक्त प्रतीक है। यह उपलब्धि वर्षों की कठोर मेहनत, अनुशासन और निरंतर साधना का परिणाम है, जिसने सीआईएसएफ महिला बैंड को राष्ट्रीय स्तर पर गौरव का पर्याय बना दिया है।
इस ऐतिहासिक उपलब्धि के उपलक्ष्य में आयोजित सम्मान समारोह में सीआईएसएफ महिला बैंड को उनकी उत्कृष्ट प्रस्तुति, अनुकरणीय समन्वय और उच्च कोटि की कलात्मकता के लिए सम्मानित किया गया। प्रतियोगिता में एक और उल्लेखनीय उपलब्धि के रूप में सर्वश्रेष्ठ कंडक्टर का पुरस्कार महिला आरक्षक लिडिया चिंगबियाकसियाम को प्रदान किया गया। उनके नेतृत्व, संगीत की गहन समझ और बैंड पर प्रभावी नियंत्रण ने यह सिद्ध कर दिया कि प्रतिभा किसी लिंग की मोहताज नहीं होती, बल्कि उसे केवल अवसर और मंच की आवश्यकता होती है।
समारोह को संबोधित करते हुए सीआईएसएफ के महानिदेशक ने कहा, “आज हम यहां अपनी उपलब्धियों का उत्सव मनाने के साथ-साथ महिलाओं की शक्ति, क्षमता और नेतृत्व का सम्मान करने के लिए एकत्रित हुए हैं। सीआईएसएफ निरंतर एक जेंडर-न्यूट्रल फोर्स बनने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।” उनका यह वक्तव्य सीआईएसएफ की उस दूरदर्शी सोच को दर्शाता है, जिसमें योग्यता, परिश्रम और प्रतिबद्धता को ही सफलता का वास्तविक मानदंड माना जाता है।
पावर थर्मल पावर प्लांट मलावन, एटा में तैनात सीआईएसएफ के डिप्टी कमांडेंट जसवीर सिंह ने इस अवसर पर कहा कि सीआईएसएफ महिला बैंड की यह सफलता एक स्पष्ट संदेश देती है कि महिलाएं आज हर क्षेत्र में पुरुषों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर न केवल सहभागिता निभा रही हैं, बल्कि प्रभावी नेतृत्व भी कर रही हैं। यह जीत उन सभी युवा महिलाओं के लिए प्रेरणा है, जो वर्दी पहनकर देश सेवा का सपना देखती हैं।
सीआईएसएफ महिला बैंड का यह स्वर्ण पदक अनुशासन की साधना, सामूहिक समर्पण और अटूट आत्मविश्वास का परिणाम है। इस उपलब्धि ने यह सिद्ध कर दिया है कि जब अवसर, प्रशिक्षण और विश्वास एक साथ मिलते हैं, तो इतिहास रचता है। यह सफलता न केवल सीआईएसएफ के लिए, बल्कि सम्पूर्ण राष्ट्र के लिए गर्व का विषय है—एक ऐसा गर्व, जो भविष्य की अनेक स्वर्णिम उपलब्धियों का मार्ग प्रशस्त करेगा।
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