मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अंतरराष्ट्रीय जैव विविधता दिवस पर राष्ट्रीय संगोष्ठी-2025 का किया उद्घाटन

‘प्रकृति तथा सतत विकास के साथ सामंजस्य’ विषय पर रखे विचार, संरक्षण को बताया समय की मांग

लखनऊ: उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अंतरराष्ट्रीय जैव विविधता दिवस के अवसर पर इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में ‘प्रकृति तथा सतत विकास के साथ सामंजस्य’ विषयक राष्ट्रीय संगोष्ठी-2025 का उद्घाटन किया। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि हमारे वैदिक ऋषियों ने सृष्टि के संरक्षण के लिए हमसे आश्वासन चाहा था कि हम संपूर्ण चराचर जगत का विचार करेंगे। मनुष्य का अस्तित्व तभी सुरक्षित रह सकता है, जब हम पेड़-पौधे, जीव-जन्तु और जल स्रोतों सहित संपूर्ण जैव विविधता की रक्षा करें।

भारत जैव विविधता के महत्व को सबसे अच्छी तरह समझता है
मुख्यमंत्री ने कहा कि भारत जैसा देश, जो सनातन संस्कृति से जुड़ा है, जैव विविधता का महत्व भली-भांति समझता है। मांगलिक कार्यों में ‘द्यौ शान्तिः, अन्तरिक्ष शान्तिः, पृथ्वी शान्तिः’ जैसे मंत्रों के साथ सम्पूर्ण सृष्टि की शांति की कामना की जाती है। यह परंपरा बताती है कि भारतीय संस्कृति में प्रकृति का कितना आदर है।

नेट ज़ीरो लक्ष्य की प्राप्ति सामूहिक जिम्मेदारी
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वर्ष 2070 तक भारत को ‘नेट ज़ीरो’ कार्बन उत्सर्जन लक्ष्य पर ले जाने का संकल्प लिया है। यह कार्य केवल सरकार की नहीं, हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है। प्रकृति से जितना अधिक निकटता होगी, मनुष्य उतना ही अधिक स्वस्थ और संतुलित रहेगा।

पर्यावरण संरक्षण के लिए पारंपरिक ज्ञान को अपनाने की जरूरत
योगी आदित्यनाथ ने कहा कि गांवों में पराली और कचरे का परंपरागत तरीके से प्रबंधन होता था, तालाबों की सफाई का विशेष ध्यान रखा जाता था। यह संतुलन अब बिगड़ गया है, जिसकी वजह से अनेक बीमारियां जन्म ले रही हैं। हमें फिर से प्रकृति के प्रति अपनी आदतों में सुधार करना होगा।

210 करोड़ वृक्षारोपण और गंगा सफाई को बताया उपलब्धि
सीएम योगी ने बताया कि उत्तर प्रदेश वन विभाग ने बीते आठ वर्षों में 210 करोड़ से अधिक वृक्षारोपण किया है, जो प्रदेश के फॉरेस्ट कवर को बढ़ाने में सहायक हुआ है। इसके साथ ही, ‘नमामि गंगे’ परियोजना के अंतर्गत गंगा की निर्मलता और अविरलता को बनाए रखने में महत्वपूर्ण सफलता मिली है।

प्रदर्शनी, पुस्तिका विमोचन और पुरस्कार वितरण
मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर जैव विविधता और ग्रीन बजट पर आधारित पुस्तिकाओं का विमोचन किया। उन्होंने जैव विविधता पर आधारित चित्रकला, निबंध लेखन और वाद-विवाद प्रतियोगिताओं के विजेता छात्र-छात्राओं को सम्मानित किया। साथ ही, कार्बन क्रेडिट के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य करने वाले पर्यावरणविदों को भी पुरस्कृत किया।

प्रकृति के प्रति दृष्टिकोण बदलना होगा: सीएम योगी
मुख्यमंत्री ने कहा कि जटायु, चींटियों और गिद्धों जैसे जीवों की घटती संख्या एक चेतावनी है। रासायनिक दवाओं और अनियंत्रित विकास मॉडल ने प्राकृतिक संतुलन को बिगाड़ा है। हमें अपनी परंपराओं की ओर लौटना होगा और पर्यावरणीय दृष्टिकोण को व्यवहार में लाना होगा।

पर्यावरण संरक्षण की कल्पना मानव-प्रकृति समन्वय के बिना अधूरी
मुख्यमंत्री ने स्पष्ट कहा कि पर्यावरण, मानव और प्रकृति के समन्वय का नाम है। केवल तकनीकी समाधान पर्याप्त नहीं हैं। हमें सामाजिक और सांस्कृतिक समझ के साथ सामूहिक प्रयास करने होंगे।

मंत्रीगण और वरिष्ठ अधिकारियों की उपस्थिति
इस संगोष्ठी में राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्री अरुण कुमार सक्सेना, श्री के.पी. मलिक, मुख्य सचिव श्री मनोज कुमार सिंह, प्रमुख सचिव श्री अनिल कुमार, प्रधान वन संरक्षक श्री सुनील कुमार समेत अनेक गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने जैव विविधता के संरक्षण को केवल पर्यावरणीय नहीं, बल्कि सांस्कृतिक, सामाजिक और नैतिक जिम्मेदारी बताया। उन्होंने सभी नागरिकों से अपील की कि वे प्रकृति के साथ सामंजस्य बनाकर जीवन और पृथ्वी को सुरक्षित रखें।

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