योगी आदित्यनाथ पर आधारित फिल्म ‘अजेय’ को सेंसर बोर्ड ने नहीं दिया सर्टिफिकेट, निर्माता पहुंचे बॉम्बे हाईकोर्ट
कोर्ट ने CBFC से पूछा – किताब पर आपत्ति नहीं, तो उससे प्रेरित फिल्म पर क्यों रोक?
मुंबई। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के जीवन पर आधारित फिल्म ‘अजेय: द अनटोल्ड स्टोरी ऑफ ए योगी’ को सेंसर बोर्ड (CBFC) द्वारा प्रमाणपत्र देने से इनकार कर दिए जाने पर इसके निर्माताओं ने बॉम्बे हाईकोर्ट का रुख किया है। यह फिल्म लेखक शांतनु गुप्ता की चर्चित किताब ‘The Monk Who Became Chief Minister’ से प्रेरित है और 1 अगस्त 2025 को रिलीज होनी थी।
शुक्रवार को जस्टिस रेवती मोहिते डेरे और जस्टिस नीला गोखले की खंडपीठ ने इस मामले की सुनवाई करते हुए CBFC से तीखे सवाल किए। अदालत ने पूछा, “जब किताब आठ वर्षों से सार्वजनिक डोमेन में है और उस पर कोई आपत्ति दर्ज नहीं हुई, तो फिर उसी पर आधारित फिल्म को प्रमाणन देने से कैसे इनकार किया जा सकता है?”
कोर्ट ने CBFC की प्रक्रिया पर उठाए सवाल
CBFC ने तर्क दिया कि उसने फिल्म की स्क्रिप्ट और संवाद के आधार पर निर्णय लिया और फिल्म देखना अनिवार्य नहीं है। इस पर खंडपीठ ने नाराज़गी जताते हुए कहा कि जब 17 जुलाई की पिछली सुनवाई में CBFC ने नियमों के अनुसार निर्णय लेने की बात कही थी, तो फिर अब तक फिल्म की स्क्रीनिंग क्यों नहीं की गई?
निर्माताओं की ओर से यह दलील दी गई कि बोर्ड ने फिल्म देखे बिना ही केवल एक ईमेल भेजकर उनका आवेदन खारिज कर दिया। इस पर कोर्ट ने सख्त रुख अपनाते हुए CBFC से पूछा, “क्या कोई नियम संवैधानिक पदों पर आसीन व्यक्तियों पर आधारित फिल्मों को प्रमाणन से रोकता है?”
प्रधानमंत्री पर बनी फिल्म का हवाला
अदालत ने यह भी कहा कि जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर बनी फिल्म पहले ही सार्वजनिक डोमेन में है, तो इस फिल्म को लेकर ऐसी आपत्ति क्यों?
कोर्ट का सख्त निर्देश
अंत में कोर्ट ने CBFC को निर्देश दिया कि वह आज ही यह स्पष्ट करे कि वह फिल्म की स्क्रीनिंग करेगा या नहीं। मामले की अगली सुनवाई में सेंसर बोर्ड को अपना रुख स्पष्ट करना होगा।
फिल्म ‘अजेय’ के निर्माता Samrat Cinematics India Pvt. Ltd. हैं और उनका कहना है कि यह फिल्म एक प्रेरणादायक जीवन यात्रा को दर्शाती है, जिसे जनता के सामने लाना उनका संवैधानिक अधिकार है।
(इनपुट एजेंसी)
