किडनी हमारे शरीर का एक बेहद महत्वपूर्ण अंग है, जो खून को साफ करने, शरीर से विषैले तत्व बाहर निकालने और पानी-नमक का संतुलन बनाए रखने का काम करती है। जब किडनी सही तरीके से काम करना बंद कर देती है, तब मरीज को डायलिसिस की जरूरत पड़ती है। ऐसे में मरीज और उनके परिवार के मन में सबसे बड़ा सवाल होता है कि क्या एक बार डायलिसिस शुरू होने के बाद इसे बंद किया जा सकता है या नहीं।
चिकित्सा विशेषज्ञों के अनुसार, डायलिसिस हर मरीज के लिए स्थायी नहीं होता। यह इस बात पर निर्भर करता है कि किडनी किस वजह से और कितनी गंभीर रूप से प्रभावित हुई है।
डायलिसिस क्या है और क्यों जरूरी होता है?
डायलिसिस एक ऐसी चिकित्सा प्रक्रिया है, जिसमें मशीन या विशेष तकनीक के जरिए खून को साफ किया जाता है। जब किडनी शरीर से विषैले पदार्थ और अतिरिक्त तरल बाहर निकालने में असमर्थ हो जाती है, तब डायलिसिस किडनी का सहारा बनता है। इसे बीमारी की सजा नहीं, बल्कि जीवन बचाने वाला उपचार माना जाता है।
किन मामलों में डायलिसिस अस्थायी हो सकता है?
डॉक्टरों के अनुसार, यदि किडनी अचानक खराब हुई हो, जिसे एक्यूट किडनी फेल्योर कहा जाता है, तो डायलिसिस अस्थायी हो सकता है। यह स्थिति निम्न कारणों से हो सकती है:
शरीर में पानी की गंभीर कमी
गंभीर संक्रमण
अत्यधिक उल्टी-दस्त
गलत दवाइयों का असर
अचानक ब्लड प्रेशर का गिरना
ऐसे मामलों में यदि समय पर सही इलाज मिल जाए, तो किडनी धीरे-धीरे दोबारा काम करना शुरू कर सकती है और डायलिसिस बंद किया जा सकता है।
किन मामलों में डायलिसिस स्थायी हो जाता है?
यदि किडनी लंबे समय से धीरे-धीरे खराब हो रही हो, जिसे क्रॉनिक किडनी डिजीज कहा जाता है, तो स्थिति गंभीर हो जाती है। यह समस्या अक्सर इन कारणों से होती है:
लंबे समय से डायबिटीज
हाई ब्लड प्रेशर
किडनी की पुरानी बीमारी
इस स्थिति में किडनी पूरी तरह ठीक नहीं हो पाती और मरीज को लंबे समय तक या जीवन भर डायलिसिस की जरूरत पड़ सकती है।
क्या दवाइयों या घरेलू उपायों से डायलिसिस बंद हो सकता है?
विशेषज्ञों का कहना है कि यदि किडनी पूरी तरह खराब हो चुकी है, तो कोई भी दवा या घरेलू उपाय डायलिसिस को पूरी तरह बंद नहीं कर सकते। ऐसे झूठे दावों से सावधान रहना जरूरी है। हालांकि सही खान-पान, नियमित दवाइयों और डॉक्टर की सलाह से किडनी की स्थिति को और बिगड़ने से रोका जा सकता है।
किडनी ट्रांसप्लांट एक स्थायी विकल्प
किडनी ट्रांसप्लांट के बाद मरीज को डायलिसिस की जरूरत नहीं रहती और वह सामान्य जीवन जी सकता है। हालांकि ट्रांसप्लांट के बाद जीवन भर दवाइयां लेनी पड़ती हैं और डॉक्टर की नियमित निगरानी जरूरी होती है। हर मरीज ट्रांसप्लांट के लिए योग्य नहीं होता, इसलिए यह फैसला पूरी जांच के बाद ही लिया जाता है।
डायलिसिस के साथ भी सामान्य जीवन संभव
डॉक्टरों के अनुसार, डायलिसिस का मतलब जीवन का अंत नहीं है। आज लाखों लोग डायलिसिस के साथ सामान्य जीवन जी रहे हैं, काम कर रहे हैं और परिवार संभाल रहे हैं। सही इलाज, नियमित जांच, संतुलित खान-पान और सकारात्मक सोच के साथ मरीज सम्मानजनक जीवन जी सकता है।
विशेषज्ञों की सलाह है कि डायलिसिस से डरने के बजाय सही जानकारी और सही उपचार पर भरोसा करें, क्योंकि कई मामलों में यह उपचार मरीज की जान बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
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Disclaimer: यह लेख केवल सामान्य जानकारी के लिए है. इस तरह की किसी भी जानकारी पर अमल करने से पहले डॉक्टर या किसी विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें
