लेकिन अगर सरकार मज़बूत हो और इन लूप होल्स पर लगाम लगाने का दम रखती हो तो हरियाणा की शराब की बोतल पर भी प्राइस टैग नज़र आ सकता है और शराब माफिया से छुटकारा मिल सकता हैं
गुस्ताख़ी माफ हरियाणा – पवन कुमार बंसल
लेकिन अगर सरकार मज़बूत हो और इन लूप होल्स पर लगाम लगाने का दम रखती हो तो हरियाणा की शराब की बोतल पर भी प्राइस टैग नज़र आ सकता है और शराब माफिया से छुटकारा मिल सकता हैं
चोली के पीछे क्या हैं – शराब की बोतल पर क्या हैं ? हमारी जाँच – अंतिम ..लेकिन अगर सरकार मज़बूत हो और इन इन लूप होल्स पर लगाम लगाने का दम रखती हो , तो हरियाणा की शराब की बोतल पर भी प्राइस टैग नज़र आ सकता है
जब होल सेल गोदाम पर सरकार के मुलाजिम बैठे हों , तो सरकार से रंगदारी कौन सा गैंगस्टर माँगेगा ? जब रिटेल आउटलेट पर फिक्स रेट की शराब बिकेगी तो साल के आख़िर में होने वाला प्रॉफिट भी फिक्स हो जाएगा , ऐसे में किसी को भी कोई क्या दे पाएगा ? चाहे डाकू आये, गैंगस्टर आये या कोतवाल । लॉटरी से रिटेल की शराब की दुकान मिले तो कोई भी शराब का बड़ा कारोबारी कहलायेगा ही नहीं । हो सकता है मामूली सी रकम लगा कर लोन लेकर ये कलम का सिपाही भी लॉटरी में ठेका मिलने पर अद्धे पव्वे बेचता नज़र आ जाये ।
इस से केवल एक स्तर पर भ्रष्टाचार बचेगा , टॉप लेवल पर । वहाँ अगर कोई संयम बरतने वाला बैठा मिल गया तो शराब से पैदा होने वाला भ्रष्टाचार अपने आप ही ख़त्म होता चला जाएगा । आम लोगों की गली गली ठेकों की परेशानी से मुक्ति । ठेकेदारों को जगह जगह नज़राने देने से मुक्ति ।
आज कई ठेकेदार ऐसे हैं जिनका शराब का कारोबार सैंकड़ों नहीं हज़ारों करोड़ में जा चुका है , ऐसे लोगों से रंगदारी मांगने का मन विदेशों में बैठे गैंगस्टर का भी कर ही जाता है , और मोलभाव हत्याओं और गोलियों से होता है । ये अपराध आगे जाकर सरकारों पर असर डालने लगते हैं ।
हरियाणा में इस बार दो मौके हैं । एक तो ये कि आबकारी विभाग का मंत्रालय मुख्यमंत्री स्वयं संभाल रहे हैं और उनकी छवि पर भी अब तक कोई दाग नहीं है । दूसरा इस बार ठेके करीब दो साल के लिये बाँटे गये हैं यानि कि 2027 तक के लिये ।
सोचने विचारने के लिये मुख्यमंत्री जी के पास पर्याप्त समय है । कोई जल्दबाज़ी नहीं ।
तो सोचने में क्या जाता है कि हरियाणा की शराब की बोतल पर भी प्राइस टैग हो
