इजरायल की अत्याधुनिक ब्लू स्पैरो मिसाइल एक बार फिर चर्चा में है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार इजरायली सेना ने खुलासा किया है कि एक बड़े सैन्य अभियान के दौरान करीब 30 मिसाइलों की बौछार की गई थी, जिनमें लेटेस्ट ब्लू स्पैरो मिसाइल भी शामिल थीं। यह मिसाइल अपने लक्ष्य पर हमला करने से पहले अंतरिक्ष की सीमा तक पहुंच जाती है, जिससे इसे रोक पाना बेहद मुश्किल हो जाता है।
कैसे काम करती है ब्लू स्पैरो मिसाइल
रिपोर्ट के मुताबिक, इजरायली जेट से दागी गई ब्लू स्पैरो मिसाइल पहले पृथ्वी के वायुमंडल से ऊपर की ओर जाती है, ताकि दुश्मन के रडार इसे इंटरसेप्ट न कर सकें। अंतरिक्ष की सीमा के करीब पहुंचने के बाद इसका बूस्टर रॉकेट अलग हो जाता है और वॉरहेड टारगेट को लॉक कर लेता है। इसके बाद मिसाइल दोबारा वायुमंडल में प्रवेश करती है और तेजी से अपने लक्ष्य पर गिरकर उसे नष्ट कर देती है।
ब्लू स्पैरो मिसाइल की खासियतें
इसमें बेहद उन्नत गाइडेंस सिस्टम लगा है, जो छोटे से छोटे टारगेट को भी निशाना बना सकता है।
इस मिसाइल के तीन प्रमुख प्रकार बताए जाते हैं – ब्लैक स्पैरो, ब्लू स्पैरो और सिल्वर स्पैरो।
इसकी मारक क्षमता करीब 2000 किलोमीटर तक बताई जाती है।
यह एक एयर-लॉन्च बैलिस्टिक मिसाइल है, जिसे लड़ाकू विमान से दागा जाता है।
मिसाइल का वजन लगभग दो टन के आसपास बताया जाता है।
इसका निर्माण वर्ष 2013 से किया जा रहा है।
अन्य मिसाइलों से समानता
सैन्य विशेषज्ञों के अनुसार, हमले का तरीका काफी हद तक पुराने स्कड मिसाइल सिस्टम और ईरान की शहाब-3 मिसाइल की रणनीति से मिलता-जुलता माना जाता है, जो पहले ऊंचाई पर जाकर फिर लक्ष्य पर गिरती हैं।
ऑपरेशन को लेकर इजरायली सेना का दावा
इजरायली सेना का कहना है कि सैन्य अभियान से पहले विरोधी पक्ष को भ्रम में रखने के लिए विशेष रणनीति अपनाई गई थी। सेना ने ऐसा माहौल बनाया कि मानो सैन्य गतिविधियां सामान्य रूप से बंद हो रही हों। इस रणनीति का उद्देश्य लक्ष्य को अचानक घेरना और प्रतिक्रिया का समय कम करना बताया गया।
रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि आधुनिक तकनीक और रणनीति के कारण ब्लू स्पैरो मिसाइल को इजरायल की सबसे उन्नत मिसाइल प्रणालियों में गिना जाता है।
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