नक्सल मुक्त होने की ओर बिहार,3 लाख का इनामी कमांडर सुरेश कोड़ा ने किया सरेंडर

मुंगेर,जमुई, लखीसराय सहित कई जिलों में 60 से अधिक मामले दर्ज

मुंगेर(सरफराज आलम) नक्सल विरोधी अभियान में पुलिस को बड़ी सफलता मिली है। तीन लाख रुपये के इनामी और स्पेशल एरिया कमांडर सुरेश कोड़ा ने बुधवार को पुलिस के समक्ष आत्मसमर्पण कर दिया। इसके साथ ही जिला प्रशासन ने मुंगेर के नक्सल मुक्त होने की दिशा में बड़ी उपलब्धि बताई है।

पुलिस केंद्र में आयोजित कार्यक्रम में सुरेश कोड़ा ने वरीय पुलिस एवं प्रशासनिक अधिकारियों की मौजूदगी में हथियार डाले। पुलिस के अनुसार लगातार दबिश, सघन तलाशी अभियान और सरकार की आत्मसमर्पण व पुनर्वास नीति से प्रभावित होकर उसने मुख्यधारा में लौटने का निर्णय लिया।

आत्मसमर्पण के दौरान उसने एक एके-47, एक एके-56, दो इंसास राइफल और 505 जिंदा कारतूस पुलिस को सौंपे। वह करीब 60 नक्सली और आपराधिक मामलों में वांछित था तथा लंबे समय से पहाड़ी और दुर्गम इलाकों में सक्रिय रहा।

पिछले एक वर्ष में जिले में नक्सल विरोधी अभियानों में तेजी लाई गई थी। दिसंबर 2025 में तीन नक्सली कमांडरों ने आत्मसमर्पण किया था, जबकि जुलाई 2025 में भी एक सक्रिय सदस्य ने हथियार छोड़े थे। लगातार पुलिस कार्रवाई और मुठभेड़ों के बाद उसका दस्ता कमजोर पड़ता गया, जिसके बाद उसके कई सहयोगी पहले ही सरेंडर कर चुके थे।

50 से अधिक मामले दर्ज

सुरेश कोड़ा पर हत्या, अपहरण, रंगदारी, सरकारी कार्य में बाधा, विस्फोटक अधिनियम और आर्म्स एक्ट सहित 50 से अधिक आपराधिक मामले दर्ज बताए जाते हैं। पूर्व में बिहार एसटीएफ के साथ एक मुठभेड़ में पहाड़ी इलाके में घेराबंदी के बावजूद वह एके-47 से फायरिंग करते हुए भाग निकला था। सूत्रों के मुताबिक हाल के दिनों तक उसकी गतिविधियां मुंगेर के अलावा लखीसराय और जमुई के पहाड़ी क्षेत्रों में देखी जा रही थीं।

आत्मसमर्पण के बाद सुरेश कोड़ा ने ग्रामीणों से क्षमा मांगते हुए दोबारा नक्सली गतिविधियों में शामिल नहीं होने की बात कही। ग्रामीणों ने भी गांव के नक्सल मुक्त होने और युवाओं के मुख्यधारा से जुड़ने की उम्मीद जताई।

प्रशासन के मुताबिक आत्मसमर्पण नीति के तहत उसे तीन लाख रुपये का इनाम, प्रोत्साहन राशि, रोजगार प्रशिक्षण भत्ता तथा पुनर्वास से जुड़ी अन्य सुविधाएं दी जाएंगी। अधिकारियों का कहना है कि सुरक्षा कार्रवाई के साथ-साथ विकास योजनाओं और रोजगार के अवसरों ने भी नक्सल प्रभाव कम करने में अहम भूमिका निभाई है। अब देखना होगा कि विकास कार्यों की रफ्तार और शांति कितनी स्थायी बनती है।

 

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