जातिगत जनगणना के पीछे छुपा बड़ा कदम? पाकिस्तान पर भारत की कार्रवाई कब होगी तय नहीं

केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक में जातिगत जनगणना का फैसला, लेकिन असली मुद्दा कहीं और?

  • एस.पी.मित्तल

नई दिल्ली: 30 अप्रैल को जब देशभर में भारत-पाकिस्तान तनाव को लेकर किसी ठोस निर्णय की उम्मीद की जा रही थी, उस समय केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने ऐलान किया कि सरकार ने जातिगत जनगणना कराने का निर्णय लिया है। इसके बाद विपक्षी दलों की ओर से प्रतिक्रिया आना शुरू हो गई।

कांग्रेस ने किया हमला, कहा – ‘खोदा पहाड़, निकली चुहिया’

कांग्रेस प्रवक्ता राशिद अल्वी ने तंज कसते हुए कहा कि 22 अप्रैल को पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद देश यह अपेक्षा कर रहा था कि मोदी सरकार पाकिस्तान पर कठोर कदम उठाएगी। लेकिन सरकार ने इसका जवाब जातिगत जनगणना के रूप में दिया। अल्वी ने कहा, “पहले पाकिस्तान को सबक सिखाना चाहिए था।”

क्या ध्यान भटकाने की रणनीति है जातिगत जनगणना का ऐलान?

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि जातिगत जनगणना की घोषणा कहीं न कहीं 22 अप्रैल की आतंकी घटना से ध्यान हटाने की रणनीति हो सकती है। मीडिया का भी फोकस अचानक सीमा सुरक्षा से हटकर जातीय आंकड़ों पर केंद्रित हो गया है।

मोदी के एक्शन की भविष्यवाणी करना आसान नहीं

हालांकि जो लोग प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के राजनीतिक अंदाज से परिचित हैं, उनका मानना है कि उनके निर्णय अचानक और चौंकाने वाले होते हैं। 30 अप्रैल को मंत्रिमंडल बैठक से पहले कैबिनेट कमेटी ऑन सिक्योरिटी (CCS) और कैबिनेट कमेटी ऑन पॉलिटिकल अफेयर्स (CCPA) की बैठकें भी हुईं — ये दोनों कमेटियाँ आपातकालीन मामलों पर चर्चा के लिए होती हैं।

CCS और CCPA की बैठकों में पाकिस्तान पर चर्चा?

सूत्रों की मानें तो इन बैठकों में पाकिस्तान की भौगोलिक स्थिति और संभावित रणनीति पर चर्चा की गई। पाकिस्तान के नेता भी लगातार यह आशंका जता रहे हैं कि भारत की ओर से सैन्य हमला हो सकता है। वहां का मीडिया और सरकार भी भारत के संभावित एक्शन से चिंतित है।

29 अप्रैल को सेना को मिली कार्रवाई की छूट?

जातिगत जनगणना की घोषणा से एक दिन पहले, यानी 29 अप्रैल को कई मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया गया कि प्रधानमंत्री मोदी ने सेना को पाकिस्तान पर कार्रवाई की पूरी छूट दे दी है। अगर यह सही है, तो यह साफ है कि मोदी सरकार सैन्य और राजनीतिक मोर्चे पर दोहरी रणनीति के तहत आगे बढ़ रही है।

जातिगत जनगणना – एक राजनीतिक हथियार या रणनीतिक मोहरा?

जब पूरा देश युद्ध की आशंका के बीच सांसें गिन रहा था, तब जातिगत जनगणना का बम विपक्ष पर फेंककर राजनीतिक विमर्श का रुख बदल दिया गया। अब जब सभी विपक्षी दल जनगणना की मांग और विवरण में उलझे हैं, मोदी सरकार कब, कहाँ और कैसे पाकिस्तान पर कार्रवाई करेगी, इसका अंदाज़ा लगाना मुश्किल है।

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