लखनऊ। उत्तर प्रदेश सरकार ने फ्लैट आवंटियों को राहत देते हुए मल्टी-स्टोरी बिल्डिंग्स में बिजली बिल को लेकर नई व्यवस्था लागू कर दी है। अब बिल्डर्स फ्लैट मालिकों से बिजली बिल वसूलने में मनमानी नहीं कर सकेंगे। उन्हें वास्तविक बिजली बिल की पूरी जानकारी देना और सभी को बिल की प्रति उपलब्ध कराना अनिवार्य होगा।
नए नियम के अनुसार, बिल में जेनरेटर चार्ज या सोसाइटी मेंटेनेंस चार्ज को शामिल करना प्रतिबंधित रहेगा। यदि किसी बिल्डर द्वारा ऐसा किया गया तो उस पर लगातार तीन बार तक अलग-अलग जुर्माना लगाया जाएगा। इसके बाद उसका सिंगल प्वाइंट कनेक्शन समाप्त कर प्रत्येक फ्लैट के लिए अलग बिजली कनेक्शन उपलब्ध कराया जाएगा।
पहली ही बार में ₹5,000 का जुर्माना
विद्युत नियामक आयोग द्वारा जारी दिशा-निर्देशों के अनुसार—
पहली बार उल्लंघन पर ₹5,000
दूसरी बार ₹10,000
तीसरी बार ₹15,000 का जुर्माना लगाया जाएगा
तिहरा उल्लंघन होने पर बिल्डर का सिंगल प्वाइंट कनेक्शन रद्द कर दिया जाएगा।
छमाही रिपोर्ट देना अनिवार्य
बिल्डर या निवासी कल्याण संघ (RWA) को हर छह माह में बिजली बिल की पूरी डिटेल उपलब्ध करानी होगी—
अप्रैल से सितंबर तक की रिपोर्ट नवंबर में
अक्टूबर से मार्च तक की रिपोर्ट मई में
साथ ही खाता-पुस्तकों का ऑडिट चार्टर्ड अकाउंटेंट से करवाना अनिवार्य किया गया है।
ऑनलाइन पोर्टल से मिलेगी पूरी जानकारी
पारदर्शिता बढ़ाने के लिए बिलिंग संबंधी सभी डाटा एक ऑनलाइन पोर्टल पर भी अपलोड किया जाएगा, जिससे आवंटियों को अपने वास्तविक बिजली खर्च से जुड़ी जानकारी आसानी से उपलब्ध हो सकेगी।
उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश वर्मा ने कहा कि इस व्यवस्था से फ्लैट मालिकों को मनमाने बिलों से राहत मिलेगी और बिजली बिल में पारदर्शिता सुनिश्चित होगी।
इन सख्त नियमों के लागू होने से अब बिल्डर्स की मनमानी पर पूरी तरह लगाम लगने की उम्मीद जताई जा रही है।
